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कटघरे में न्यायपालिका

Bhola Tiwari Jul 05, 2019, 7:04 AM IST टॉप न्यूज़
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अजय श्रीवास्तव

एएनआई की खबर के अनुसार इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक विद्वान जज रंगनाथ पाण्डेय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक शिकायती पत्र लिखा है। पत्र का मजमून ये है कि आप देखें सुप्रीमकोर्ट और हाईकोर्ट में कैसे जजों की नियुक्ति में कैसे वंशवाद और भाई भतीजावाद होता है।

जज रंगनाथ पाण्डेय ने लिखा है कि यहाँ न्यायाधीशों के परिवार का सदस्य होना हीं अगला न्यायाधीश होना सुनिश्चित करता है। न्यायाधीश ने आगे लिखा है लोकतंत्र के तीन स्तंभों में से सर्वाधिक महत्वपूर्ण न्यायपालिका वंशवाद और जातिवाद से बुरी तरह ग्रस्त है। उन्होंने ये भी लिखा कि विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में अनेक मापदंड हैं मगर सुप्रीमकोर्ट और हाईकोर्ट में ऐसी कोई निश्चित कसौटी नहीं है। यहाँ एक हीं मापदंड है परिवारवाद और भाई भतीजावाद। न्यायाधीश ने आगे लिखा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी आपको लोकसभा 2019 में पूर्ण बहुमत प्राप्त करने की बधाई। आपने वंशवाद की राजनीति को खत्म करने का महत्वपूर्ण काम किया है।

दूसरी महत्वपूर्ण खबर इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक जज को हटाने के लिए चीफ जस्टिस आँफ इंडिया रंजन गोगोई ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है। दरअसल इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज एस.एन.शुक्ला के खिलाफ भष्टाचार के आरोप हैं।मामला ये है कि जस्टिस शुक्ला हाईकोर्ट में एक खंडपीठ की अध्यक्षता कर रहे थे,जब उन्होंने शीर्ष न्यायालय की सीजेआई नीत पीठ के आदेशों का उल्लंघन करते हुए निजी काँलेजों को 2017-18 के शैक्षणिक सत्र में छात्रों को नामांकन देने की अनुमति दी। उनके आदेश को सरासर उच्च न्यायालय के आदेशों की अवहेलना कहा गया। उनपर निजी काँलेजों से पैसा लेकर निर्णय देने का आरोप भी लगा।

आरोपों की जाँच के लिए एक समिति बनाई गई और समिति ने उन्हें कदाचार का दोषी पाया। समिति ने मुख्य न्यायाधीश को उन्हें उनके पद से हटाने की सिफारिश भी की। इस उच्च स्तरीय जांच समिति में मद्रास हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश इंदिरा बनर्जी, सिक्किम हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एस.के.अग्निहोत्री और मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पी.के.जायसवाल शामिल थे।

तत्कालीन चीफ जस्टिस आँफ इंडिया न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा ने न्यायाधीश शुक्ला को इस्तीफा देने की सलाह दी या अपनी इच्छा से रिटायरमेंट लेने को कहा,मगर शुक्ला ने मना कर दिया। सीजेआई ने उन्हें तत्काल प्रभाव से न्यायिक कार्य से हटा दिया, उसके बाद जस्टिस शुक्ला लंबी छुट्टी पर चले गए।

इतने दिन चुप रहने के बाद 23 मार्च को जस्टिस शुक्ला ने सीजेआई को पत्र लिखकर काम माँगा। इस पत्र को इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने सुप्रीमकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को फार्वर्ड कर दिया था।

हाईकोर्ट या सुप्रीमकोर्ट के कार्यरत न्यायाधीश को हटाने का ये प्रावधान है कि इस चिठ्ठी को प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति राज्यसभा के उप सभापति को प्रेषित करते हैं। उप सभापति चीफ जस्टिस आँफ इंड़िया से बातचीत कर तीन सदस्यीय जाँच समिति की नियुक्ति करते हैं।ये समिति सुप्रीमकोर्ट द्वारा नियुक्त की गई समिति की साक्ष्यों को गहनता से पड़ताल करती है,साक्ष्यों को कलमबद्ध कर अपनी रिपोर्ट राज्यसभा के उप सभापति को भेजती है। वो ये भी राय देती है कि उस न्यायाधीश को हटाने के लिए ऊपरी सदन में बहस हो या नहीं।

सीजेआई के पत्र पर प्रधानमंत्री को निर्णय लेना होगा,प्रधानमंत्री ने भी इस पत्र को कानून मंत्रालय के पास सुझाव देने के लिए भेज दिया होगा।

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