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सनक पर सवार, पर्यावरण पर तलवार

Bhola Tiwari Jul 05, 2019, 6:57 AM IST टॉप न्यूज़
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कबीर संजय

पैसे की सनक सबकी दुश्मन है। पेड़-पौधे, पानी, पहाड़ और प्रकृति। उसके लिए सब बस उसकी इच्छा पूर्ति के साधन है। वो सबकुछ खरीद सकता है। औली ने हाल ही में इसकी एक झलक देखी है। यहां पर होने वाली सिर्फ एक शादी के बाद अब तक 32 हजार एक सौ किलो कचरा बटोरा किया जा चुका है। 

किसी भुतही फिल्म के भयावह दृश्य की तरह ही पूंजीपतियों की निगाह भी जिस हरी-भरी धरती पर पड़ती है उसका रंग काला पड़ जाता है। औली हमारे देश की कुछ सबसे ज्यादा खूबसूरत जगहों में शामिल हैं। सहारनपुर के मूल निवासी और दक्षिण अफ्रीका में बिजनेस करने वाले गुप्ता ब्रदर्स को यह जगह इतनी पसंद आई कि उन्होंने यहां पर शादी समारोह आयोजित करने का फैसला किया। 18 से 20 जून तक यहां पर वैवाहिक समारोह का आयोजन किया गया। 

तमाम पर्यावरण विद इसके खिलाफ थे। उनका कहना था कि ऐसे प्राकृतिक वातावरण में होने वाला ऐसा महंगा तामझाम प्राकृतिक सुंदरता को नष्ट कर देगा। लेकिन, सुनता कौन है। दो सौ करोड़ रुपये की शादी होने थी। गारंटी के तौर पर गुप्ता बंधुओं से 54 हजार रुपये जमा कराए गए। जबकि, उन्होंने यहां पर साफ-सफाई में आने वाले खर्च की भरपाई का भी वचन दिया है। अब तक यहां से 32 हजार किलो से ज्यादा कचरा बटोरा जा चुका है। 

समझ ही सकते हैं कि जिस शादी में प्रभुत्वशाली लोग शामिल होते हैं, उसको होने से कौन रोक सकता है। ये गुप्ता बंधु हैं कौन। दक्षिण अफ्रीका में इन पर आए भ्रष्टाचार के आरोपों और सांठ-गांठ के आरोप में एक राष्ट्रपति को इस्तीफा देना पड़ा है। भ्रष्टाचार के चलते खुद इनके व्यवसाय के ऊपर भी तलवार लटकी हुई है। इसके बावजूद पैसे की ताकत इतनी है कि वे औली जैसी किसी प्राकृतिक दृश्यावलि को अभी कत्ल करने की हैसियत रखते हैं।  

स्थानीय लोगों को उम्मीद थी कि दो सौ करोड़ शादी होगी तो कुछ न कुछ उनके हिस्से में भी आएगा। तो कुछ टुकड़े गुप्ता बंधुओं ने स्थानीय लोगों और सरकारों की तरफ भी फेंक दिया। खुले में शौच और कचरा फैलाने के लिए उन पर ढाई लाख रुपये का जुर्माना किया गया है, जबकि हाईकोर्ट इस मामले की सुनवाई आठ जुलाई को करेगा। 

इससे पहले हमारे देश के सबसे बड़े पूंजीपति भी अपनी बेटी की शादी में कई सौ करोड़ खर्च कर चुके हैं। जिस देश में बच्चे बिना इलाज मर जाते हों, वहां पर धन के ऐसे प्रदर्शन ज्यादा अश्लील क्या होगा। 

खैर, प्रकृति की परवाह किसे है। कुछ साल पहले एक अरबपति, कारपोरेट अध्यात्मिक गुरू को यमुना किनारे अध्यात्मिक सम्मेलन आयोजित करने की सनक चढ़ी थी। लोग चिल्ला रहे थे कि इससे यमुना की प्रकृति बरबाद हो जाएगी। लेकिन, उसकी मदद करने के लिए भारतीय फौज तक को उतार दिया गया। हो भी क्यों न, उस समारोह में प्रधानमंत्री तक को भाग जो लेना था। 

कोई भी समझ सकता है कि जिस समारोह के आयोजन में खुद सरकार की दिलचस्पी हो, उस पर कोई जुरमाना लगाने में न्याय करने वालों को भी कितने पसीने छूटेंगे। अभी भी यह जुरमाना चुकाया नहीं गया है। 

(तस्वीर इंटरनेट से। विवाह समारोह के बाद की)

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