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गरीबों की बस्ती

Bhola Tiwari Jul 03, 2019, 9:04 AM IST टॉप न्यूज़
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नीरज कृष्ण

क्या कारण है कि आज 72 वर्षों के बाद भी देश से गरीबी नहीं मिटी, जबकि हर राजनैतिक दलों के घोषणा-पत्र में गरीबी उन्मूलन को प्राथमिकता से स्थान दिया जाता है। बजाय गरीबी मिटाने के देश मे गरीबों की संख्या में इजाफा होता चला जा रहा है।

आज 72 वर्षों के बाद भी अपने देश के गरीबों की बस्ती में बच्चे भूख से बिलखते हुए मिल जायेंगे, तो किसी के घर मे शराब के नशे में धुत्त व्यक्ति अपनी पत्नी को बेरहमी से पिटता हुया मिल जाएगा और पत्नी सिसकती हुई मिल जाएगी। आज भी गरीबों के घरों में में इतनी दरिद्रता , इतनी भूखमरी है कि आदमी "रोटी" के आगे कुछ सोच ही नहीं पाता......

आज 72 वर्षों के बाद भी हमारे देश के गरीब लोगों की बस्तियों की स्थिति यह है कि वहाँ कुछ खद्दरधारी नेता आते हैं, अपने चमचो के साथ........... हमें पैसों से खरीदने में सफल हो जाते हैं, जातिवाद के उन्मादी जहर की घूंट पिलाते हैं, धर्म और महजब के नाम पर बाँटने में सफल हो जाते हैं, शराब की बोतलें/पाउच बाँटते है, रोटी देते हैं और कहते हैं "इस चुनाव चिन्ह" पर ही निशान लगाना, अगर हम जीत गए तो तुम्हारी बस्ती के दिन पलट देंगे ........

अब यह तय हमें करना है ईमानदारी से, उस वक़्त कौन जीतेगा? "भूख" या "चरित्र"........, "रोटी" या......... "ईमानदारी".......।

इसीलिए आज तक हर "राजनीतिक दल" ने देश को "गरीब, लाचार, बेबस" बना कर रखा हुआ है; क्यूंकि जब 'देश' गरीब रहेगा, "गरीबी" भी बड़े आसानी से "बिकेगी"।

कांग्रेस, भाजपा, राजद, जदयू, समाजवादी पार्टी,  बसपा, बामपंथी, तृणमूल, तमाम राजनैतिक दलों से मेरा सीधा और स्पष्ट प्रश्न........आज तक देश मे गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम क्यों नही सफल हुए जबकि सभी राजनैतिक दल अरबपति होते चले गए।

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