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हमेशा राज सत्ता के खिलाफ शंखनाद करते रहे जनकवि नागार्जुन

Bhola Tiwari Jul 03, 2019, 8:48 AM IST टॉप न्यूज़
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नीरज कृष्ण

हिंदी की प्रगतिशील काव्य-धारा में नागार्जुन जैसे कवि कम ही दिखलाई पड़ते हैं, जिन्होंने आजीवन शोषित-उत्पीड़ित जनता की आवाज को स्वर दिया। राज सत्ता के खिलाफ जन आंदोलनों में सक्रिय रहे, पुलिस की लाठियां खाई, जेल भी गए। 

बाबा नागार्जुन कबीर, भारतेंदु और निराला की परंपरा के कवि हैं। उनकी कविताओं में शोषकों-शासकों और उनके चाटुकारों के प्रति इतना गहरा व्यंग है कि आलोचकों ने उन्हें 'आधुनिक कबीर' कहना शुरू कर दिया। सच पूछा जाए तो नागार्जुन ने कविताओं में व्यंग की जो धार पैदा की, वैसा शायद ही कोई कभी कर पाया। यह व्यंग व्यवस्था की विद्रूपताओं और उसके प्रति आक्रोश से उत्पन्न होता था।

1930 के दशक के प्रारंभ में यात्री जी के नाम से लिखना प्रारंभ किया। नक्सलवादी आंदोलन पर उन्होंने 'भोजपुर' शीर्षक से काफी चर्चित कविता लिखी। उन्होंने कई उपन्यास भी लिखा। मैथिली में लिखा गया उनका उपन्यास 'बलचनमा' प्रेमचंद की 'गोदान' की परंपरा का उपन्यास माना जाता है।

लोग कहते हैं कि नागार्जुन जब -"इंदु जी इंदु जी क्या हुआ आपको ? सत्ता के मद में भूल गई बाप को?" --कविता को जब मंच पर नाच नाच कर सुनाते थे समा बन जाता था।

नागार्जुन की प्रमुख कविता संग्रह है- पत्रहीन नग्न गाछ, युगधारा, सतरंगे पंखों वाली तालाब की मछलियां, खिचड़ी विप्लव देखा हमने, हजार-हजार बाहों वाली, पुरानी जूतियों का कोरस, तुमने कहा था, आखिर ऐसा क्या कह दिया मैंने, इस गुब्बारे की छाया में यह इनकी प्रतिनिधि कविताएं हैं।

मैथिली कविता संग्रह 'पत्रहीन नग्न गाछ' के लिए इन्हें 1969 में "साहित्य अकादमी पुरस्कार" मिला। 1983 में उत्तर प्रदेश सरकार ने भारत-भारती पुरस्कार दिया। इन्हें 'सोवियत लैंड नेहरू अवार्ड' से भी सम्मानित किया गया।

बाबा नागार्जुन बामपंथी विचार को मनाने वाले लोगों में थे। अत्यंत ही सरल प्रकृति के व्यक्ति....बातों को सुनने के बाद सोच कर बोलने की उनमे प्रवृति थी। आगंतुकों को उचित सम्मान दिया करते थे। पटना स्थित उनकी हिंदी साहित्यकार पुत्री पद्मश्री उषा किरण खान के आवास पर जब मैं मिलने गया तो उन्होंने यह महसूस ही नही होने दिया कि वह हिंदी साहित्य के कितने बड़े हस्ताक्षर हैं। नागार्जुन का साहित्य सिर्फ हिंदी ही नहीं, विश्व साहित्य की थाती है। ऐसे साहित्यकार युगों में पैदा होते हैं।

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