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मानसून - उम्मीदों का झमझमाझम

Bhola Tiwari Jul 02, 2019, 1:53 PM IST टॉप न्यूज़
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 एस डी ओझा

बारिश का इंतजार भारतीय किसान बड़ी बेसब्री से करता है. बारिश होने से उसकी उम्मीदें जवान हो जाती हैं. किसान को अच्छी फसल की आशा बंधती है. अच्छी फसल से किसान की बिटिया की शादी , साहूकार की कर्ज अदायगी की उम्मीद जगती है . विदेशी भारतीय कृषि को मानसिक जुआ कहते हैं . फसल न होने पर किसान की सारी उम्मीदें जुए में हारे जुआरी की तरह नेस्तनाबूद हो जाती हैं. परिणामत: किसान आत्म हत्या करने के लिए मजबूर हो जाता है .

मानसून शब्द अरबी से निकला है . अरबी के शब्द मावसिम का भारतीयकरण हो मौसम बना . इस मौसम का अंग्रेजी रुप माॅनसून हुआ . माॅनसून उन हवाओं को कहते हैं,जो अरब सागर व हिंद महासागर से चलकर भारत के दक्षिण व पश्चिम तट पर टकराती हैं. ये हवाएं अपने साथ ढेर सारी नमी लाती हैं . यही नमी भारत में झमझमाझम बारिश लाती है . ये हवाएं जून से सितम्बर तक सक्रिय रहतीं हैं. कई बार किसी साल ये हवाएं चक्रवात में फंसकर अपनी नमी खो देती हैं , जिससे उस साल बारिश कम होती है. बारिश कम होने से सूखा पड़ जाता है .फसल कम होती है. इस वर्ष कृषि पंडितों की मानसून सम्बंधी भविष्यवाणी बिल्कुल सटीक व सही बैठी है . इस बार नियत समय पर मानसून आया है .

नियत समय पर आने के बाद मानसून ने अपना जलवा दिखाना शुरू कर दिया है. गुजरात में मूसलाधार बारिश की वजह से बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गयी है.हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश के कारण कुल्लू -मनाली -लेह राजमार्ग पर भारी भूस्खलन हुआ है . मानसून के आमद होने पर मध्य प्रदेश ,उत्तर प्रदेश , राजस्थान में अच्छी बारिश हुई है .दिल्ली तो बिना मानसून के हीं जून से बारिश की चपेट में है. यहां केवल जून में हीं १९१ .९९ एम एम बारिश हो चुकी है ,जो सामान्य से २.५ गुना ज्यादा है. जिम कार्बेट वन्य जीव पार्क में इन दिनों शिकारी अत्यधिक सक्रिय हो जाते हैं. इन शिकारियों पर अंकुश लगाने के लिए सभी संवेदनशील जगहों पर कैमरे लगा दिए गये हैं. हाथी गार्ड गश्ती दल बढ़ा दिए गयें हैं.

मानसून के बादलों से प्रेरित होकर कालिदास ने"मेघदूत" जैसी कालजयी काव्यग्रंथ की रचना कर डाली . इस ग्रंथ के अनुसार अलकापुरी के राजा कुबेर एक यक्ष को एक साल की निर्वासन की सजा देते हैं. यक्ष रामगिरी पर्वत पर यह सजा काट रहा है. बारिश के मौसम में उसे अपनी प्रेयसी याद आ रही है. वह मेघ को अपना दूत बनाकर अपनी प्रेयसी अलकापुरी के पास संदेश भिजवाता है,अपने दिल का हाल बताता है. यह विप्रलम्भ श्रृंगार कालिदास को महान कर गया. कालिदास ने यक्ष के विरह वेदना को इस तरह से उकेरा कि पूरा विश्व उनका लोहा मान गया . कई तो यह भी मान रहे हैं कि वह यक्ष स्वंय कालिदास हीं हैं. इतना सुंदर वियोग का वर्णन किसी भुक्त भोगी के वश की हीं बात हो सकती है. बाबा नागार्जुन ने तो डंके की चोट पर यह बात कही है .

हिंदी के कवि भी कालिदास से पीछे नहीं रहे . तुलसी दास ने अपने "राम चरित मानस "महाकाव्य में ," घन घमंड नभ गरजत घोरा , प्रियाहीन डरपत मन मोरा" , लिखकर वियोग व पावस का अतीव सुंदर चित्रण किया है .उर्दू शायरा परवीन शाकिर ने तड़प के इतिहास का यह नजारा पेश किया -

बारिश हुई तो फूलों के तन चाक हो गये ,

मौसम के हाथ भींग के शफ्फाक हो गये.

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