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जो आप 55 साल में न कर सके वो भाजपा ने अपने दूसरे कार्यकाल में कर दिखाया

Bhola Tiwari Jul 02, 2019, 8:15 AM IST टॉप न्यूज़
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अजय श्रीवास्तव

लोकसभा में शुक्रवार को लंबी चर्चा के बाद "जम्मू कश्मीर आरक्षण संशोधन विधेयक" को ध्वनिमत से मंजूरी दी गई। केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने जम्मू कश्मीर आरक्षण अधिनियम,2004 में संशोधन के लिए शुक्रवार को लोकसभा में विधेयक पेश किया था।

सदन में इस विषय पर चर्चा के दौरान कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने आरक्षण देने का समर्थन किया लेकिन इसके तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह बिल राज्य विधानसभा में लाया जाना चाहिए था।इस संशोधन बिल पर टीएमसी, बीजेडी और वीएसआर ने सरकार का खुलकर समर्थन किया।

अब ये प्रश्न उठता है कि "क्या है "जम्मू कश्मीर आरक्षण अधिनियम,2004?

आपको बता दें इस विधेयक के तहत जम्मू कश्मीर में अंतरराष्ट्रीय सीमा के 10 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोगों को शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी नौकरियों में 3% आरक्षण को विस्तार दिया गया है।जम्मू कश्मीर आरक्षण अधिनियम सीधी भर्ती, प्रमोशन और विभिन्न श्रेणियों में कई व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आरक्षण देता है,लेकिन इसका विस्तार अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे व्यक्तियों के लिए नहीं था।इस बिल के कानून बन जाने के बाद यह लोग भी आरक्षण के दायरे में आ जाएंगे।इस बिल से जम्मू, सांबा और कठुआ के 435 गाँवो को लाभ होगा।

आपको बता दें अंतरराष्ट्रीय सीमा पर जिंदगी कितनी दुरूह है।आये दिन सीमा पार से हैवी फायरिंग होती रहती है, कभी शेल तो कभी मोर्टार से इनके घरों पर हमला होता है।इस हमले में काफी जानमाल का नुकसान होता है और लोगों को या तो बंकर में छुपना पड़ता है या सरकार द्वारा बनाए गए राहत कैंपों में।अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बसे लोगों की मुख्य जीविका खेती और पशुपालन है जो गोलीबारी में तहसनहस हो जाती है।अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बसे लोगों ने बहुत पहले हीं आरक्षण देने की मांग की थी जिसे तत्कालीन कांग्रेस सरकार टालती रही।टालती भी कैसे नहीं उसे एक वर्ग विशेष को खुश करना होता था जो देश में उसके वोटबैंक हुआ करते थे।

बमबारी के समय स्कूल लंबे अरसे तक बंद हो जाती हैं जिससे वहाँ के बच्चे ठीक से पढ़ नहीं पाते,स्थिति इतनी विकट हो जाती है कि रात में लाईट जलाना मना हो जाता है।सीमापार से लाइट को लक्ष्य करके फायरिंग होती है।अब अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बसे परिवार के बच्चों को भी 3% आरक्षण का लाभ मिलेगा और वे भी राष्ट्र निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकेंगे।

नरेंद्र मोदी सरकार ने अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बसे लोगों की पुरानी मांग को मान लिया है और मुझे उम्मीद है इसका भरपूर फायदा वे उठा सकेंगे।

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