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राजतंत्र है, पर राजा का अधिकार नहीं

Bhola Tiwari Jul 02, 2019, 6:10 AM IST टॉप न्यूज़
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प्रवीण झा

(जाने माने चिकित्सक नार्वे)

तेल के इस देश में न कतर सी अय्याशी है, न वेनेजुएला सी गरीबी, यहाँ साधारण संघर्षशील जीवन है। यहाँ तेल पानी से सस्ता नहीं, बल्कि विश्व में सबसे मंहगी है। यहाँ कोई इतना अमीर नहीं कि बीस लक्ज़री गाड़ी या हेलिकॉप्टर लेकर घूमे। यहाँ कई पार्टियों को मिला कर मिला-जुला गठबंधन ही राज करता रहा है, जिसमें दक्षिणपंथी और वामपंथी मिश्रित सरकार भी रही। 

यहाँ करदाताओं पर भारी बोझ है। और यह एक जनकल्याणकारी राज्य (वेलफ़ेयर स्टेट) है जहाँ स्वास्थ्य-शिक्षा मुफ्त, और बेरोजगार-बीमार-वृद्ध सेवाएँ सरकारी हैं। इस हद तक हैं कि एक विकलांग बच्चे के मां-बाप को सरकार ने BMW की बड़ी विकलांग चेयर वाली गाड़ी भी दे दी। 

नॉर्वे का तेल वेनेजुएला की तरह राष्ट्रीयकृत है। लगभग सभी कमाई की चीजें सरकार के अंदर हैं, या सरकार का शेयर है। लॉटरी से घुड़सवारी तक। नॉर्वे में विदेशी निवेश उस हद तक ही है कि देश का उद्योग बचा रहे। नौकरीयों में प्राथमिकता स्थानीय लोगों को सबसे पहले है। और इनके सरकारी फ़ंड ने विश्व भर में तमाम उद्योगों में पैसा लगा रखा है। 

धर्म की शिक्षा अनिवार्य है, पर चर्च खाली हैं। राजतंत्र है, पर राजा का अधिकार नहीं। यौन विषमता नहीं। आर्थिक विषमता नहीं। सब औसत ही कमाते हैं, औसत ही जीते हैं। पर यह औसत जीवन का देश आज अधिकतर इन्डेक्स में सर्वोच्च है। 

पूंजीवाद से धन, मोटा टैक्स, और उससे जनित जनकल्याण। समाजवादी और पंथनिरपेक्ष नीति। एक मजबूत ‘इन्क्लूज़िव’ लोकतंत्र। कुछ-कुछ भारत की तरह?

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