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मुख्य न्यायाधीश ने "नया रोस्टर सिस्टम" लागू किया, सभी न्यायाधीशों को बरकरार काम

Bhola Tiwari Jul 01, 2019, 1:15 PM IST टॉप न्यूज़
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अजय श्रीवास्तव

सुप्रीमकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने नया रोस्टर लागू किया है जो 01 जुलाई 2019 यानी कि आज से लागू हो जाएगा।नए रोस्टर सिस्टम के मुताबिक पीआईएल यानी जनहित याचिकाओं से जुडें मामलों को भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और जस्टिस एस.ए.बोबड़े,एन.वी रमन्ना,अरूण मिश्रा और आर.एफ.नरीमन की अध्यक्षता वाली पीठ सुनेगी।

आपको याद दिला दें पूर्व सीजेआई दीपक मिश्रा के कार्यकाल में सारी जनहित याचिकाएँ वे स्वंय सुनते थे।गौरतलब है कि अधिकांश जनहित याचिकाएँ सरकार के खिलाफ दायर की जाती है और बहुत से मामले में सरकार इसमें असहज हो जाती हैं।पूर्व सीजेआई दीपक मिश्रा के ताल्लुकात सरकार से बहुत अच्छे थे और वो लगभग सरकार के पक्ष में हीं निर्णय दिया करते थे। सीनियर जजों ने सीजेआई मिलकर अनुरोध किया कि उन्हें भी पीआईएल और सरकार से संबद्ध मामलो की सुनवाई में शामिल किया जाए,मगर दीपक मिश्रा ने सीनियर जजों की बात को अनसुना कर दिया था।इसी वजह से सुप्रीमकोर्ट के पाँच सीनियर जजों ने तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ प्रेस कांफ्रेंस किया था।

रंजन गोगोई ने मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ लेने के तुरंत बाद एलान किया था कि सुप्रीमकोर्ट में रोस्टर सिस्टम जल्द लागू होगा और उन्होंने तुरंत लागू भी किया।

कुछ जजों के सेवानिवृत्त हो जाने से सीजेआई को फिर से नया रोस्टर सिस्टम बनाना पड़ा और वह आज से लागू हो गया है।नए रोस्टर सिस्टम के मुताबिक पीआईएल यानी जनहित याचिकाओं से जुड़े मामलों को भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और जस्टिस एस.एस.बोबड़े, एनवी रमन्ना, अरूण मिश्रा और आरएफ नरीमन की अध्यक्षता वाली पीठ सुनेगी।

सुप्रीमकोर्ट के नए रोस्टर सिस्टम के मुताबिक चुनाव से जुड़े मामलों, जिन्हें पहले सिर्फ मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली बेंच सुनती थी,उन्हें अब जस्टिस बोबडे की अध्यक्षता वाली बेंच से बाँटा जाएगा।नए रोस्टर सिस्टम के मुताबिक सीजेआई की बेंच अब सामाजिक न्याय, चुनावों, कंपनी कानून, मोनोपोली और प्रतिबंधित व्यापार प्रेक्टसेस,भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण, सिक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड आँफ इंड़िया,बीमा और रिजर्व बैंक आँफ इंडिया से जुडे मामलों पर दी गई याचिकाओं की सुनवाई भी करेगी।इसके अलावा सीजेआई मध्यस्थता, हैबियस काँरपस,आपराधिक मामलों, न्यायालय की अवमानना और सामान्य सिविल मामलों को भी सुनेगी।

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के प्रयास से हीं इस बार सुप्रीमकोर्ट में जजों की संख्या पूरी हुई है।सुप्रीमकोर्ट में 31 जजों की जगह है जो बहुत दिनों बाद गोगोई के प्रयास से भरी गई है।मुख्य न्यायाधीश ने नई रोस्टर व्यवस्था में सभी को शामिल कर विवादों को हमेशा के लिए दफन कर दिया है जो प्रशंशनीय है।

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