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सूली ऊपर सेज पिया की.......!!

Bhola Tiwari Jun 30, 2019, 7:23 AM IST टॉप न्यूज़
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नीरज कृष्ण

हमने यह महसूस किया है कि जब किसी रेलगाड़ी में अच्छे इंजन को लगा दिया जाता है तो खराब डिब्बे भी दौड़ पड़ते हैं और यदि रेलगाड़ी के कितने भी अच्छे डिब्बे क्यों न लगा दिए जाएं, यदि इंजन ही गड़बड़ है तो वे अच्छे डिब्बे भी खड़े रह जाते हैं। ठीक यही स्थिति किसी भी संस्था या राजनैतिक दलों की भी होती है। 

नरेंद्र मोदी जी एक अच्छे एवं शक्तिशाली इंजन के रूप में खुद को प्रस्तुत कर भाजपा नामक रेलगाड़ी को तेज गति से खींचते हुए उसके गंतव्य संसद तक सुरक्षित रूप से पहुंचाने में सफल रहे।

राम-रावण के युद्ध मे भी यही स्थिति थी, राम का नेतृत्व बहुत अच्छा था। यही कारण रहा कि रावण की संगठित एवं बलशाली सेना को भी राम हराने में सफल रहे।

एक ओर जहां राम के प्रति अगाध प्रेम में सभी अपने प्राण तक स्वेच्छा से दावं पर लगाने को सदैव तत्पर रहे वहीं दूसरी तरफ रावण सदैव भय का माहौल बनाता रहा, लोगों में मिथ्या भ्रम और दुष्प्रचार फैलाता रहा।

 भयपूर्ण वातावरण में कोई भी नेतृत्व अच्छा परिणाम नही दे सकता है, यही कारण था कि देश की जान सामान्य ने विपक्ष को सिरे से नकारते हुए मोदी जी मे अपनी आस्था को प्रकट किया।

अच्छे नेतृत्व के लिए आवश्यक है कि लोगोंपर विश्वास किया जाए, उनके राय को महत्व दिया जाय, भयमुक्त वातावरण तैयार किया जाए और अपने दल को सुरक्षा प्रदान करे। और इस कार्य मे प्रधानमंत्री मोदी जी पूर्णरूपेण सफल रहे हैं। 

ठीक इसके विपरीत सम्पूर्ण विपक्ष अपने ही लोगों में भयाक्रांत का माहौल पैदा कर भयभीत कर अपने तरफ जोड़ने के कार्य मे जुटा रहा और उसकी हर का एकमात्र कारण भी यही रहा। रामचरितमानस की एक पंक्ति याद आ रही है--

"जो रन विमुख सुना मैं काना। सो मैं हतब कराल कृपाना।।

सर्बसु खाई भोग करि नाना। समर भूमि भाय बल्लभ प्राना।।"

जनता-जनार्दन ने वर्तमान सरकार में अपनी अटूट आस्था जताते हुए उनपर बहुत सारी जिम्मेवारियों को भी सौंपा है। नई सरकार के पास कश्मीर, 'राम' की जगह रोजगार, 'आर्थिक-विषमताओं' जैसे कठिन मुद्दों पर कार्य करनी होगी। संवैधानिक संस्थाओं की गिरती हुई साख को....गुप्तचर संस्थाएं, न्यायालय, आर्थिक-वित्तीय नियामकों की साख को पुनः स्थापित करनी होगी। हिंदी भाषा को न सिर्फ यथोचित सम्मान दिलाने की जिम्मेवारी आगामी सरकार की होगी बल्कि हिंदी को रोजगार से जोड़ने के लिए भी कदम उठानी होगी। महिला-सुरक्षा पर भी सरकार को कड़े फैसले लेने की आवश्यकता उतनी ही है जितनी नकली दवा-व्यपार पर नियंत्रण।

भारत आज दुनिया मे सबसे ज्यादा युवाओं का देश है, यदि युवाओं को रोजगार/व्यपार की तरफ समुचित रूप से नहीं जोड़ा गया तो एकाएक यह देश मात्र कुछ दसकों में दुनिया के सबसे ज्यादा शिक्षित पिछड़े वृद्धों के देश मे शुमार हो जाएगी।

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