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माननीय कोर्ट ने 20 साल तक स्वस्थ होने का मौका दिया उसके बाद सजा सुनाई

Bhola Tiwari Jun 29, 2019, 5:23 PM IST टॉप न्यूज़
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अजय श्रीवास्तव

यह एक सच्ची घटना है जो आज से 20 साल पहले मुंबई के सांताक्रूज में घटी। गफ्फार नामक एक युवक किसी कारणवश आवेश में आकर सड़क के किनारे सो रहे अशोक यादव को चाकू से गोदकर मार डालता है और वह फरार हो जाता है। सटीक मुखबिरी के कारण गफ्फार पकडा जाता है। पुलिस केस दर्ज कर गफ्फार को कोर्ट में पेश करती है तो वह अदालत में अजीबोगरीब हरकतें करने लगता है।उसकी दिमागी हालत पर शक होने के बाद कोर्ट चिकित्सकीय जाँच का आदेश देती है।

मुंबई के थाणे में स्थित "इंस्टीट्यूट आँफ फिजियोलाजिक हेल्थ" में उसकी जाँच होती है और वहाँ के डाक्टर उसे "स्किट्जोफ्रेनिया" नामक मानसिक रोग से पीडित घोषित करते हैं। कोर्ट में रिपोर्ट जमा होती है और विद्वान न्यायाधीश उसे मानसिक अस्पताल में इलाज कराने का आदेश देते हैं।

गफ्फार का इलाज "इंस्टीट्यूट आँफ फिजियोलाजिक हेल्थ" में ग्यारह साल चलता है, फिर उसे पुलिस कोर्ट में पेश करती है। विद्वान न्यायाधीश उससे बहुत से सवाल करते हैं मगर गफ्फार उसका एक भी उत्तर सही से नहीं दे पाता।न्यायमूर्ति कहते हैं कि गफ्फार की मानसिक हालत अभी भी ठीक नहीं है, अतः उसे फिर से अस्पताल में भर्ती कर इलाज कराया जाय। एक बार फिर से गफ्फार का इलाज सात साल तक होता है फिर डाक्टर उसे स्वस्थ घोषित करते हैं।

कोर्ट गफ्फार के मानसिक स्थिति से पूर्णतया संतुष्ट हो जाता है तो वह कोर्ट की कार्रवाई पूरी करता है और गफ्फार को अशोक यादव हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा सुनाता है। विद्वान न्यायाधीश ने अपने आदेश मे कहा कि यह पूरी तरह स्पष्ट है कि अपराध करते समय गफ्फार स्वस्थ्य था और उसे यह पता था कि वह क्या कर रहा है।जिसकी सजा गंभीर हो सकती है। कोर्ट ने उसे दोषी माना और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

कोर्ट की इस मामले में तारीफ करनी होगी कि उन्होंने मानसिक रूप से बीमार गफ्फार को ठीक होने का मौका दिया,और बीस साल तक उसके स्वस्थ्य होने का इंतजार किया। जब वह मानसिक रूप से स्वस्थ्य हो गया तब उसे सजा सुनाई गई। जब कोर्ट सजा सुना रहा था तो गफ्फार सर नीचे कर सजा सुन रहा था।

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