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कृष्ण पहुँच गये यूनान

Bhola Tiwari Jun 29, 2019, 5:06 AM IST टॉप न्यूज़
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एस डी ओझा

जिसे हम यूनान कहते हैं , उसे पाश्चात्य जगत में ग्रीस या ग्रीक कहते हैं । सिकंदर ने बिखरे यूनान को अपने झण्डे तले ला खड़ा किया था । वह अपनी विजय पताका फहराता हुआ भारत के पंजाब तक पहुँच गया था । उसे पंजाब के राजा पोरस ने कड़ी टक्कर दी थी । पोरस से लड़ने के उपरांत सिकंदर के सैनिकों ने भारत में आगे बढ़ने से इंकार कर दिया । लिहाजा सिकंदर का सपना भारत विजय का अधूरा रह गया । वह बड़े बेमन से भारत से लौटा । 323 ई पू बेबलोन में उसकी मौत हो गयी थी । उस समय उसकी उम्र केवल 32 वर्ष थी ।

ग्रीस पर बहुत सालों तक तुर्कों ने शासन किया था । फ्रांस क्रांति के बाद और तुर्कों का अपने हीं देश में पराभव के बाद अब ग्रीस के नेताओं ने भी तुर्को से आजाद होने की सोची । रुस , फ्रांस और ब्रिटेन ने इस आजादी के जंग में ग्रीस का साथ दिया था । यह जंग 1821-1829 तक चली थी । 1829 में ग्रीस एक स्वतंत्र राष्ट्र घोषित हो गया । ग्रीस में संसदीय व्यवस्था कायम हो गयी । प्रथम विश्व युद्ध में ग्रीस तटस्थ रहा था । द्वितीय विश्वयुद्ध में ग्रीस को इटली से लड़ना पड़ा । ग्रीस ने आरम्भिक असफलता के बाद इटली को नाकों चने चबवा दिए । 1940 में इटली को वहाँ से दुम दबाकर भागना पड़ा । ग्रीस ने इटली के 20000 सैनिकों को बंदी बना लिया था । इटली के ग्रीस से हटने के बाद जर्मनी ग्रीस पर चढ़ आया । अबकी बार पासा पलट चुका था । जर्मनी ने ग्रीस को बुरी तरह से नेस्तनाबूद कर दिया ।

विश्व में सबसे पहले लोकतंत्र ग्रीस में आया था । ग्रीस ने पूरी दुनियां को नाटक का तोहफा दिया था । यहां पहली बार नाटक का मंचन हुआ था । किसी के ऊपर सेव फेंकने का मतलब प्यार का इजहार करना होता है । यहां इडियट वह कहलाता है जो राजनीति में भाग नहीं लेता । रेड कारपेट बिछाने की परम्परा ग्रीस से हीं शुरु हुई थी । पुराने ग्रीस में लोग स्वस्थ आहार खाकर सौ साल तक जीते थे । भारत में भी " जीवेम् शरदः शतम् " की प्रार्थना की जाती है ।  

चंद्रगुप्त मौर्य के समय में भी सिकंदर का सेनापति सेल्यूकस अफगानिस्तान जीतता हुआ भारत की तरफ बढ़ा था । यहां चन्द्रगुप्त मौर्य ने सेल्यूकस को बुरी तरह से हराया । सिकंदर की हीं भांति सेल्यूकस भी अपने वतन लौट गया था । उसने अपनी बेटी की शादी चंद्रगुप्त मौर्या से कर दी । अफगानिस्तान में अपना एक नुमाइंदा छोड़ सेल्यूकस यूनान लौट गया था । खुदाई करने से कुछ ऐसे सिक्के मिले हैं , जिन पर बलराम और कृष्ण के चित्र बने हैं । एक सिक्के पर हीराक्लीस लिखा है । विद्वानों का मत है कि यह हरि कृष्ण है जो बाद में बिगड़ कर हीराक्लास हो गया । सेल्यूकस ने मेगस्थनीज नाम के एक शख्स को चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में राजदूत नियुक्त किया था । 

जब मेगस्थनीज ग्रीस लौटा तो अपने साथ यहां की संस्कृति भी साथ लेता गया । उसने वहाँ जाकर मेथोरा ( मथुरा ), क्लैसबोरा (कृष्ण पुरी ) , जोबारस (यमुना ) और सौर सेनोई ( शूर सेना ) के नाम पर एक पुस्तक लिखी । आज यह किताब अप्राप्य है , लेकिन इस किताब के उद्धरण आज भी इतिहास लेखकों की किताबों में अवश्य मिलेगा । आज का ग्रीस कृष्ण की पूजा हीराक्लीस के रुप में कर रहा है।

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