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पर्यावरण (दिवस) संरक्षण : अभी क्या जल्दी है !!

Bhola Tiwari Jun 28, 2019, 7:08 AM IST टॉप न्यूज़
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नीरज कृष्ण

कुछ दिन पहले विश्व पर्यावरण दिवस था (05 जून)। 2017 में विश्व पर्यावरण सम्मलेन पेरिस में ही आयोजित किया गया था। विश्व के 195 देश अन्तराष्ट्रीय कानून-पेरिस समझौता, 2016 के तहत दुनिया के लगभग हर देश ने धरती के उत्तरोत्तर गर्म होते जाने से रोकने के लिए पेरिस जलवायु समझौते पर अपनी सहमति जताई है। पेरिस समझौता 1 जून 2020 से पूरी दुनिया में प्रभावी होगी।

 मानव सभ्यता के विकास की कहानी वास्तव में प्रकृति अथवा पर्यावरण के अंधाधुंध दुरूपयोग की डरावनी कहानी कही जा सकती है। बीती शताब्दी में सभ्यता के विकास के साथ-साथ शहरीकरण, और औद्योगीकरण का तेजी के साथ विस्तार हुआ। विस्तार की उस गति में मनुष्य ने प्राकृतिक संसाधनों का अविवेकपूर्ण दोहन किया। जब इसका परिणाम पर्यावरणीय असंतुलन के रूप में हमारे सामने आया, तब हमारी नींद टूटी और ऐसा महसूस होने लगा कि हमने पर्यावरण के साथ काफी लापरवाहीपूर्ण बर्ताव किया है। अंधाधुंध विकास और टिकाऊ विकास के बीच का अंतर पर्यावरण को मजबूती दे सकता है। टिकाऊ विकास कोई कठिन काम नहीं, बशर्ते इसके लिए हम स्वयं को प्रकृति को हिस्सा माने और पारिस्थितिकीय दृष्टिकोण को विकसित करें। 

हमारे विकास की भौतिकवादी और पूंजीवादी विचारधारा ने पर्यावरण को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया है। हर शहर, हर गांव और हर महानगर में दिन प्रतिदिन गगनचुंबी भवनों का निर्माण हो रहा है, किंतु हमारे जंगलों को बचाने कोई प्रयास नहीं दिख रहे है। उल्टा निर्माण कार्यों के चलते खेती योग्य उर्वरक जमीन का दुरूपयोग भी किसी से छिपी नहीं है। अब बड़े शहरों में शुद्ध हवा की कल्पना भी बेमानी लगने लगी है।

अब जब हमने भी आज और केवल आज के लिए पर्यावरण-प्रेमी का चोला पहन ही लिया है तो हमें इन मुद्दों पर शिद्दत से विचार करना चाहिए कि:-

क्या हम स्पेन से यह नहीं सीख सकते हैं कि किस तरह से उजड़े हुए जंगल को पुनः विकसित किया जाये, अपने खोये हुए पुराने पेड़ों को फिर से खोज कर लगाया जाये।

क्या हम फ्रांस से उपयोग की गयी पुरानी इस्तेमाल में ना आने वाली चीज़ों को फेंकें नहीं वरन उनके पुनः रिसाईकिल कर पुनः प्रयोग का उपाय खोजें।

क्या हम एक ऐसी प्रतियोगिता का आयोजन नहीं कर सकते जिसमें सबसे ज्यादा गन्दगी फैलाने वाले को पुरस्कृत किया जाए और पुरस्कार स्वरुप उसे उसी के द्वारा फैलाये गये कूड़ा-कबाड़ का मोमेंटो प्रदान किया जाए।

वृक्ष तो ज़रूर लगायें खासकर हर मौसम के फलदार पेड़, औरों के लिए नहीं तो कम से कम अपने लिए ही सही। वृद्धावस्था में अगर संतान धोखा दे गई तो भूखा मरने से तो बच जायेंगें।

कम से कम साल में आज के दिन तो पर्यावरण-प्रेमी का चोला पहनें। बुरी आदतें एकदम से नहीं छूटती इसलिए कोई जल्दबाजी नहीं। अरे कभी तो वो सुबह आएगी.......।

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