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आस्ट्रेलिया की नाडिया ने कभी मचाई थी बॉलीवुड में धूम

Bhola Tiwari Jun 28, 2019, 5:26 AM IST टॉप न्यूज़
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एस डी ओझा

आस्ट्रेलिया के पर्थ में 8 जनवरी सन् 1908 को जन्मी थीं नाडिया . इनका आरम्भिक नाम मेरी इवान्स वाडिया था , जिसे एक मित्र अमेरिकी ज्योतिष की सलाह पर बदल कर नाडिया रखा गया . नाडिया के पिता ब्रिटिश सेना में थे . प्रथम विश्व युद्ध से पहले उनका तबादला भारत के मुम्बई नगर में हुआ . जब प्रथम विश्व युद्ध शुरू हुआ तो उनके पिता को युद्ध के लिए फ़्रांस के मोर्चे पर भेजा गया , जहाँ उनकी मौत हो गई थी . पिता के मौत के पश्चात् नाडिया और उनकी माँ स्थाई रूप से भारत में हीं अब परिवार की जिम्मेदारी नाडिया के नाजुक कन्धों पर आ गई. नाडिया ने नौ सेना की कैंटीन में सेल्स गर्ल का काम किया . प्राइवेट फर्म में सेक्रेटरी बनीं और सर्कस कम्पनी में भी कलाबाजियां खाईं .

बाद में बैले नृत्य में प्रवीण होकर नाडिया ने उसे पेशे के रूप में अपनाया . उनकी बैले नृत्य की किसी समारोह में परफॉरमेंस देख कर मुम्बई फ़िल्म प्रोड्यूसर होमी वाडिया काफी प्रभावित हुए और उन्हें अपनी " मूवी टोन " कंपनी में काम करने का न्योता दिया . इस तरह से नाडिया को पहली मूक फ़िल्म मिली " लाल -ए - अमन " . नाडिया अच्छे कद काठी की थीं . उनके कद के हीरो की ढूँढ हुई . आखिर में All India body beautiful competition के विजेता जॉन कावस का चयन किया गया . नाडिया और जॉन कावस की जोड़ी ने बॉलीवुड में धूम मचा दी.इस जोड़ी ने कई हिट फ़िल्में बॉलीवुड को दीं . स्टंट फिल्मों में काम करने में इस जोड़ी को महारत हासिल थी . इन दोनों का प्रिय स्टंट था -दौड़ते हुए घोड़े पर से कूदकर चलती रेल गाड़ी में चढ़ जाना . इस तरह के दृश्य दर्शकों को भी बहुत पसन्द आए . इसलिए एक ट्रेन सिक्विल बनाया गया . जैसे - फ्रंटियर मेल , पंजाब मेल और दिल्ली एक्सप्रेस आदि .

जब नाडिया की फ़िल्म "हन्टर वाली " बनी तो उस दौर में उस फ़िल्म के लिए कोई वितरक नहीं मिला . वितरकों ने सोचा कि हिरोईन के हाथ में हन्टर देख भारतीय दर्शक फ़िल्म नहीं देखने आएंगे . होमी वाडिया ने खुद इस फ़िल्म का वितरण का जिम्मा सम्भाला . फ़िल्म सुपर डुपर हिट रही . उन दिनों फ़िल्में 60 हजार रूपये में बन जाती थीं ,परन्तु इस फ़िल्म की कुल लागत 80 हजार आई थी . इतनी बड़ी लागत की फ़िल्म बनाकर होमी वाडिया ने एक जुआ खेला था , जिसमें उनकी जीत हुई थी .

आस्ट्रेलिया की नाडिया ने इस देश की संस्कृति में अपने को इस प्रकार ढाल लिया कि जैसे दूध में शक्कर . वे उस समय के नए कलाकारों और सह कलाकारों के लिए एक मिशाल बन गईं थीं .उन्होंने फिल्मों में जो दबंग व निडर महिला का रोल किया उसे देखकर आज के सलमान खान की भी दबंगई भी शर्म महशूस करेगी . किसी भी भारतीय भाषा में फ़िल्म अभिनेत्री की इस तरह की दबंगई अभी तक देखने को नहीं मिली है . लोग उन्हें fearless lady के तौर पर जानते थे . उनकी लगभग हर फ़िल्म में उनके साथी के तौर पर एक घोड़ा और कुत्ता जरूर होते थे . फ़िल्म " जंगल प्रिंसेस " में उन्होंने एक साथ 4 शेरों के साथ काम किया था . फ़िल्म "मुक़ाबला " में उन्होंने बन्दूक के आकार के सिगरेट के लाइटर से लड़ाई की थी , जो उस दौर में काफी पसन्द किया गया था .

नाडिया का हिंदी उच्चारण कुछ कमजोर था.इस कमी को उन्होंने स्वध्याय से दूर किया और फ़िल्म " पहाड़ी कन्या " में एक लम्बा सम्वाद बिना उच्चारण दोष के बोला . यही नहीं उन्होंने अपने अभिनय का लोहा भी मनवाया है . फ़िल्म " मौज " में उन्होंने दर्शकों की आँखों में आँसू अपने जीवन्त अभिनय से ला दिया था . उनका पहनावा और पोशाक उस समय एक फैशन ट्रेंड बन गया था . मूक फिल्मों से सन् 1930 में उनका शुरू किया गया इस फ़िल्मी सफर का अंत सन् 1959 में हुआ .उन्होंने होमी वाडिया से शादी कर फ़िल्मी दुनिया को अलविदा कह दिया . बाद में सन् 1968 में किसी फ़िल्म में काफी मिन्नत करने पर अतिथि कलाकार के तौर पर दिखाईं पड़ी थीं . 

10 जनवरी सन् 1996 को इस दबंग अभिनेत्री के प्राण पखेड़ु उड़ गए .आस्ट्रेलिया के मेलबोर्न में नाडिया को श्रद्धांजलि देने की नियत से संगीतकार बेन वाल्स ने उनकी कुछ उम्दा और बेहतरीन फिल्मों का लाइव बैंड प्रस्तुत किया था . उसमें भारतीय संगीतकारों यथा -तबला वादक अनीश प्रधान ,सारंगी वादक संगीत मिश्र और शास्त्रीय नर्तकी श्रुति घोष ने भी शिरकत की थी . आस्ट्रेलिया के भी दिग्गज कलाकारों ने इस समारोह में भाग ले कर नाडिया को तहे दिल से याद किया . एक विनम्र श्रद्धांजलि -

कहीं कहीं से हर चेहरा तुम जैसा लगता है .

तुमको भूल न पाएंगे हम अब ऐसा लगता है .

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