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2019 में इंसेफेलाइटिस "शर्म की बात" और 2017 में "प्राकृतिक आपदा"

Bhola Tiwari Jun 27, 2019, 8:28 AM IST टॉप न्यूज़
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अजय श्रीवास्तव

हर वो मामला जो "साहेब" को सूट करता है उसपर वे बेहद मुखर रहते हैं मगर वो मुद्दे जो उनके दामन को दागदार करते हैं वे खामोशी अख्तियार कर लेते हैं।वो खामोशी भी इतनी लंबी और अंतहीन होती है कि खामोशी खुद शर्मसार हो जाती है।

150 बच्चों की अकाल मौत पर देर से हीं सही "साहेब" का जमीर जागा और उन्होंने राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान बोलते हुए उन्होंने कहा कि बिहार में चमकी बुखार(इंसेफेलाइटिस)से 150 से अधिक मासूमों की मौत को शर्म की बात कहा है।उनके मुताबिक,"आज भी बुखार से बच्चों की मौत होना हमारी(भारत की)असफलताओं में से एक है।"

आपको याद दिला दें 15 अगस्त 2017(स्वत्रंत्रता दिवस)को राष्ट्र के नाम संबोधन में प्रधानमंत्री ने गोरखपुर और आसपास के 14 जिलों में जापानी इंसेफेलाइटिस से हुई मौतों को प्राकृतिक आपदा कहा था।बता दें कि इस मामले में 175 बच्चों की मौत हुई थी।

आपने कहा कि सात दशक से ये बीमारी हमें चुनौती दे रही है।प्रधानमंत्री जी आप बताएं एक तरफ तो आप कह रहें हैं कि इंसेफेलाइटिस सात दशक से हमें चुनौती दे रही है मगर आप ये नहीं कह रहें हैं कि पिछले पाँच सालों में आपने इससे लड़ने के लिए क्या क्या किया? मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच में बच्चे दवा के बिना,बदइंतजामी से मरते रहे और आप अपने स्वागत समारोह में व्यस्त रहे।नवआगंतुक सांसदों को दिल्ली के फाइवस्टार होटल में डिनर कराते समय एक बार भी आपके दिल में उन बच्चों का ख्याल आया जो बिना वेंटिलेटर के कालकवलित हो गए।बीमार बच्चों के माँ-बाप चीख चीख कर कह रहे थे कि यहाँ डाक्टरों की बेहद कमी है,एक सीनियर डाक्टर दो दो आईसीयू देख रहा है मगर बलपूर्वक, छलपूर्वक उनकी आवाज को दबा दिया गया।

आपके केन्द्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री को प्रेसवार्ता में सोते हुए देखा गया, बिहार के स्वास्थ्य मंत्री बच्चों की लाश देखने के बाद मीडियाकर्मियों से भारत का स्कोर पूछ रहे थे।इन संवेदनहीन व्यक्ति से आप कुछ करने की उम्मीद कर रहे थे तो आप गफलत में थे।अश्विनी चौबे रात भर पार्टी कर भेद मिटाने मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच हर्षवर्धन के साथ आए थे।

मुजफ्फरपुर और उसके आसपास में मानवता शर्मशार है,सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तो मानों हर दुख सुख से ऊपर उठ गए हों।एसकेएमसीएच में सिर्फ मौत का तांडव हो रहा है और गरीब अपने बच्चे को मरता हुआ देख रहें हैं मगर आपको उससे क्या।कांग्रेस को कोसने और हर बात के लिए उसको जिम्मेदार ठहरा देने से आप बच नहीं सकते।आपने देश पर पाँच साल शासन किया है हिसाब तो आपको भी देना होगा।बच्चों के माता-पिता के बद्दुआ में आपको भी बराबर शरीक होना पड़ेगा।

नीतीश कुमार की संवेदनहीन सरकार और केन्द्र की नरेंद्र मोदी की सरकार ये अच्छी तरह से जानती है कि इस एरिया में इंसेफेलाइटिस हर साल फैलती है और सैकड़ो बच्चे काल के गाल में समा जाते हैं फिर भी ये बदइंतजामी नाकाबिलेबर्दास्त है,लेकिन फिक्र किसको।भारत की जनता ये कुछ दिनों में भूल जाएगी और फिर अगले साल मौत का अंतहीन सिलसिला यूँ हीं जारी रहेगा।

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