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इलाके का डाॅन

Bhola Tiwari Jun 26, 2019, 7:02 AM IST टॉप न्यूज़
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एस डी ओझा

2017 की बात है । कान्हा नेशनल जूलाॅजिकल पार्क में दो बाघ साथ साथ दिखाई पड़े थे । ऐसा बहुत हीं कम होता है । बाघ अपने अपने इलाके में रहते हैं । कोई किसी के इलाके में नहीं जाता । वन्य कर्मचारियों की परेशानी तब और बढ़ गयी जब उस इलाके में एक बाघिन भी आ पहुँची । दोनों बाघ आपस में बाघिन के लिए छिटपुट लड़ाई भी करने लगे थे । दरअसल बाघिन अपने बच्चों को भी साथ लायी थी । अपने बच्चों को सुरक्षित स्थान पर रखकर वह इन दोनों बाघों के बीच रहती थी, ताकि इन दोनों को उसके बच्चों के बारे में पता न चले । बाघिन इन दोनों के बीच झगड़े की जड़ बन रही थी । दोनों बाघ साथ साथ चल रहे थे । इसका मतलब दोनों एक दूसरे को आजमा रहे थे । बाद में मौका पाकर बाघिन अपने बच्चों को लेकर वहां से खिसक गयी थी । बाघिन नहीं रही तो दोनों बाघ भी अपने अपने इलाके में चले गये । इसी के साथ वन विभाग ने भी चैन की सांस ली थी । यदि दोनों बाघ लड़ते तो शर्तिया एक की मौत होती । बाघ के मरने पर विभागीय जांच चलती और किसी न किसी की जिम्मेदारी तय की जाती । किसी न किसी की प्रोन्नति प्रभावित होती ।

बाघ अक्सर अपने इलाके में रहना पसंद करता है । वह अपने इलाके में किसी को नहीं आने देता । वह अपने मूत्र से अपने इलाके की हदबंदी करता है । वह अपने इलाके का डाॅन कहा जाता है । कई बार बाघ बाघिन की हत्या कर देता है । ऐसे में बच्चे अनाथ हो जाते हैं । उन्हें शिकार करना पूरी तरह से नहीं आता । वे अपना मल मूत्र खुले में नहीं छोड़ सकते । इससे उनकी स्थिति का पता चल जाता । वे पानी के अंदर अपना मल मूत्र त्याग करते हैं ताकि इलाके के बाघ को उनकी मुश्क न आए । कई बार भूख से व्याकुल होकर वे किसी अन्य बाघ के क्षेत्र में चले जाते हैं । ऐसे में वह बाघ उनका काम तमाम कर देता है । बाघ बाघिन का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए भी उसके बच्चों को मार देता है । बच्चों के मर जाने के बाद बाघिन मेटिंग के लिए तैयार हो जाती है।

बहुत से लोगों को बाघ और शेर में अंतर नहीं पता होता है । शेर के सिर के चारों ओर झबर बाल होते हैं। उसका सिर चौड़ा होता है । उसकी आवाज भी बहुत डरावनी होती है । शेर को बब्बर शेर भी कहते हैं । बब्बर शेर सामाजिक होता है । यह झुण्ड में रहना पसंद करता है । इसके झुण्ड में कई शेरनियां होती हैं । छोटे बड़े बच्चे भी रहते हैं । शेर एक आलसी जीव होता है । यह 17/18 घंटे सोना पसंद करता है । शिकार केवल शेरनियां हीं करतीं हैं । शेर का काम खाना और सोना होता है । यह अपने झुण्ड के प्रति वफादार होता है । बाहर से आए किसी शेर को भगाने में यह देर नहीं लगाता । इसके इन्हीं आदतों के कारण इसे जंगल का राजा कहा जाता है । बाघ के शरीर पर काली धारियां होतीं हैं । यह एक क्षेत्र का डाॅन होता है । बाघ अपने इलाके की चौकस निगरानी करता है । बाघ यदि गल्ती से आदमी का मांस खा ले तो वह नरभक्षी हो जाता है । शेर के बारे में ऐसा नहीं सुना गया है ।

शेर, बाघ , चीता, गुलदार और तेंदुआ बिड़ाल प्रजाति के खूंखार जानवर हैं । यदि इनसे सामना हो जाए तो भागना नहीं चाहिए । आप डटकर खड़े हो जांय । हाँ, इतना ख्याल जरुर रखें कि इनकी आंख में आंख न मिलाएँ । खनकियों से देखते रहें । आप उल्टे कदमों से पीछे चलते रहें । जब ये भी आप की तरफ बढ़ने लगें तो आप खड़े हो जांय । आप पीठ कभी नहीं दिखाएँ । ऐसा करने से खूंखार जानवर सोचेगा कि आप डर गये हैं और भाग रहे हैं । वह आप पर हमला कर देगा । यदि आपकी मुलाकात शेर से हुई है तो आपको और चौकन्ना रहना पड़ेगा । शेर का पूरा खानदान वहाँ आ सकता है । आप पीछे हटतें रहें । जानवर पर नजर रखते हुए । जब आपको लगे कि वह खूंखार आप पर हमला करने वाला है तो आप अपना आकार बड़ा करें । जोर से चिल्लाएं । कोशिश करें कि आपका एक जोरदार पंच उसकी नाक पर पड़े । ऐसा करने वालों को मरने की सम्भावना केवल 1% होती है । इसके बावजूद वह खूंखार नहीं मानता है तो आपको कुछ नहीं करना पड़ेगा । अब जो भी करेगा वह खूंखार हीं करेगा ।

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