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तुर्की के राष्ट्रपति आर्दोआन की पार्टी एकेपी की इस्तांबुल मेयर के चुनाव में करारी हार

Bhola Tiwari Jun 25, 2019, 6:32 PM IST टॉप न्यूज़
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अजय श्रीवास्तव

तुर्की के राष्ट्रपति रैचप तैय्यप आर्दोआन कहा करते थे कि "जो इस्तांबुल जीतेगा वही तुर्की जीतेगा।"

एकेपी की इस्तांबुल मेयर के चुनाव में करारी हार हुई है।एकेपी का इस्तांबुल में पिछले पचीस साल से शासन था और इनके उम्मीदवार पूर्व प्रधानमंत्रीबिनाली यिल्दीरिम ने अपनी हार मान ली है और अपने प्रतिद्वंद्वी को जीत की बधाई दी है।

आपको बता दें एकेपी पहले हीं चुनाव हार गई थी मगर राष्ट्रपति आर्दोआन ने चुनाव में धांधली का आरोप लगाकर फिर से चुनाव कराया था जिसे जनता ने फिर से नकार दिया है।इस बार एकेपी का उम्मीदवार और बडे मार्जिन से हारा है।

आर्दोआन को तुर्की के लोग तुर्की गणराज्य की नींव रखने वाले मुस्तफा कमाल पाशा यानी अतातुर्क के बाद सबसे ताकतवर नेता मानते हैं।

आपको बता दें आधुनिक टर्की के पिता कहे जाने वाले मुस्तफा कमाल ने अपने कुशल नेतृत्व में न केवल टर्की को पराधीनता से मुक्त किया, अपितु टर्की को एक ऐसा नया रूप दिया जिसके कारण टर्की विश्व में शक्तिशाली राज्य बन पाया।टर्की का पुनर्निर्माण करनेवाले मुस्तफा कमाल को अतातुर्क के नाम से भी पुकारा जाता है।भारत में गाँधीजी को महात्मा और राष्ट्रपिता की उपाधि दी गई वैसे हीं तुर्की में मुस्तफा कमाल को अतातुर्क की उपाधि से नवाजा गया था।

प्रथम महायुद्ध के पश्चात क्षत-विक्षत तथा खंडहर बने टर्की को नई अर्थव्यवस्था, नया संविधान, नया समाज, नई विदेश नीति देकर मुस्तफा कमाल ने पुनर्जीवित किया।मुस्तफा कमाल पाशा की गिनती विश्व के महान शासकों में की जाती है।

मुस्तफा कमाल पाशा ने तुर्की को प्रगतिशील राष्ट्रों की श्रेणी में ला खडा करने के लिए गणतंत्रवाद, ,राष्ट्रवाद , समानतावाद, नियंत्रित अर्थवाद, धर्मनिरपेक्षतावाद एंव क्रांतिवाद नामक छह सिद्धांतों का प्रतिपादन किया।शुक्रवार के स्थान पर 1935 से साप्ताहिक छुट्टी का दिन रविवार कर दिया गया, जो उस समय बहुत बडा कदम था।

मुस्तफा कमाल पाशा के बाद राष्ट्रपति रैचप तैय्यप आर्दोआन हीं सबसे ज्यादा वक्त तक शासन करनेवाले व्यक्ति हैं मगर इस्तांबुल शहर के मेयर पद की हार ने उनके लिए खतरे की घंटी बजा दी है।अब ये देखना महत्वपूर्ण होगा कि वे अपनी पार्टी को फिर से कैसे सशक्त बनाते हैं।

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