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पत्रकार जमाल खाशोगी और अमेरिका

Bhola Tiwari Jun 25, 2019, 8:21 AM IST टॉप न्यूज़
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अजय श्रीवास्तव

दूनिया का चौधरी बना अमेरिका पत्रकार जमाल खाशोगी हत्याकांड की एफबीआई से जाँच के अनुरोध को दरकिनार कर दिया है। दरअसल संयुक्त राष्ट्र के एक विशेषज्ञ ने पत्रकार जमाल खाशोगी हत्याकांड में सऊदी अरब राजशाही की संलिप्तता की जाँच एफबीआई से कराने की मांग के बाद ट्रंप ने इस मामले में कार्रवाई को दरकिनार कर दिया।अमेरिका के सबसे विवादित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि इससे पहले बहुत सी जाँच हो चुकी है, कुछ सामने आया नहीं। हमने सऊदी अरब से व्यापार को महत्व दिया है जिसे जारी रखा जाएगा। सऊदी अरब व्यापार में हमारा अहम सहयोगी है। सऊदी अरब एक निर्धारित समय में 400 से 450 अरब डाँलर कारोबार पर खर्च करता है, उसके पास धन है,नौकरियाँ हैं और वह हथियारों पर भी धन खर्च करता है। ऐसे में मैं उसके साथ व्यापार नहीं करने की मूर्खता नहीं कर सकता।

वाह ट्रंप महोदय इसका मतलब ये हुआ कि जो राष्ट्र आपके साथ खुलकर व्यापार कर रहा है उसकी सारी गलती माफी लायक है। आप दोरंगा व्यवहार करते हैं, ईरान को बिना कसूर प्रताडित किया जा रहा है और सऊदी अरब का हत्यारा क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को आप बचा रहें हैं क्योंकि सऊदी अरब आपका प्रमुख सहयोगी है। अमेरिका की इस दोगली नीति की कटु आलोचना होनी चाहिए मगर दूनिया के इस चौधरी से टकराने की हिम्मत किसी के पास नहीं है।

आप भारत का हीं उदाहरण देख लें, एक हत्यारे के स्वागत में नरेंद्र मोदी सरकार ने रेड कार्पेट बिछा दिये थे। वे क्राउन प्रिंस सलमान के स्वागत में एअरपोर्ट गए थे। बडी बडी बातें बोलने वाले नरेंद्र मोदी का जमीर उस समय सो गया था क्या ? 

आपको बता दें सऊदी अरब के मशहूर पत्रकार और घटना के समय अमेरिकी नागरिक जमाल खाशोगी दो अक्टूबर को अपनी शादी से जुडे दस्तावेज लेने के लिए तुर्की में अपने देश के वाणिज्यिक दूतावास गए थे, लेकिन वो फिर वापस नहीं लौटे।खाशोगी को तुर्की की राजधानी इस्तांबुल स्थिति सऊदी अरब दूतावास में मार दिया गया और उनके शरीर के सैकड़ों टुकड़े करके वहीं दफना दिया गया।

गौरतलब है कि एक समय जमाल खाशोगी सऊदी के शाही परिवार के सलाहकार हुआ करते थे लेकिन धीरे धीरे वो सऊदी राजशाही के प्रखर आलोचक बन गए।2011 का "अरब स्प्रिंग" आने के बाद इस्लामिक समूहों ने कई देशों की सत्ता अपने हाथ में ले ली थी,जमाल ने इन इस्लामिक समूहों को अपना समर्थन दिया तभी से वे राजशाही के निशाने पर आ गए थे।

जमाल खाशोगी का जन्म सन् 1958 में मदीना में हुआ था।उन्होंने अमेरिका के इंडिआना स्टेट यूनिवर्सिटी से अपनी बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की पढाई पूरी की। पढाई के बाद वो सऊदी अरब लौट आए और सन् 1980 में एक पत्रकार के तौर पर अपने कैरियर की शुरुआत की। वो एक क्षेत्रीय अखबार में रिपोर्टर के तौर पर काम करते थे, जहाँ वो अफगानिस्तान पर सोवियत आक्रमण की खबरों को कवर करते थे। इस दौरान उन्होंने चरमपंथी संगठन "अल-कायदा" के नेता ओसामा बिन लादेन के उदय को नजदीक से देखा। 1980 और 1990 के दशक में उन्होंने कई दफा ओसामा का इंटरव्यू लिया।

2003 में वो अलवतन अखबार के संपादक बन गए, लेकिन सिर्फ दो महीने में हीं उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया, क्योंकि वो सऊदी के शाही परिवार की आलोचना वाली खबरें छाप रहे थे।

2012 में वो सऊदी के समर्थन वाले अल अरब न्यूज चैनल के प्रमुख बना दिए गए।इस चैनल को कतर से फंड किए जाने वाले अल जजीरा का प्रतिद्वंद्वी माना जाता था। बहरीन स्थिति इस चैनल में पहले ही दिन स्पीकर के तौर पर बहरीन के एक प्रमुख विपक्षी नेता को बुलाया गया, जिसकी वजह से लान्च के सिर्फ 24 घंटे के बाद हीं इस चैनल को बंद कर दिया गया।

जमाल खाशोगी का आखिरी लेख वाशिंगटन पोस्ट में 11 सितंबर को प्रकाशित हुआ था, उनके लापता होने के बाद अखबार ने शुक्रवार को उनके काँलम की जगह खाली छोड दी।

मैं भी आज अपने साथी जमाल खाशोगी को अंतिम श्रद्धांजलि देता हूँ और कहता हूँ जमाल भाई हम पत्रकार बिरादरी आपको इंसाफ नहीं दिला सके क्योंकि आपकी हत्या में वो धनाढ्य शामिल है जिससे दूनिया का तथाकथित जज अमेरिका भी डरता है। उसे डर है कि अगर आपकी हत्या की जाँच एफबीआई करेगा तो वो हत्यारा अमेरिका से व्यापार बंद कर सकता है।

शर्मिंदगी के अलावा मैं और क्या कर सकता हूँ।

विनम्र श्रद्धांजलि जमाल खाशोगी।

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