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कुआँरे युवकों को पकड़कर जबर्दस्ती नसबंदी कर दी गई

Bhola Tiwari Jun 21, 2019, 6:40 AM IST टॉप न्यूज़
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अजय श्रीवास्तव

इंदिरा गांधी और संजय गांधी की सनक से देश में आंतरिक आपातकाल लगा।आपातकाल के दौरान नागरिकों के बहुत से अधिकार को स्थगित किया गया या समाप्त कर दिया गया था।मगर आपातकाल लगने के बाद कुछ फायदा भी हुआ।सरकारी कर्मचारी समय पर आँफिस आने लगे,रिश्वत लेना-देना लगभग बंद हो चला था,जो बसें कभी टाईम पर नहीं चलती थीं वो बिल्कुल समय पर चलने लगीं थीं।सरकारी डाक्टर जो बहुत कम हस्पताल जाते थे समय पर ड्यूटी करने लगे।संजय गाँधी हमेशा उन्हें टारगेट देते रहते थे और कड़ी समीक्षा विभागाध्यक्ष या सीएमओ द्वारा की जाने लगी।हालत ये थे कि सरकारी डाक्टर एजेंटो को कमीशन देकर नसबंदी के लिए लोगों को बुलाते थे।बहुत जगह तो कुआँरे युवकों को पकड़कर जबर्दस्ती नसबंदी कर दी गई।मुसलमानों के मुहल्लों में डाक्टर और उनके ऐजेंटों की खूब कुटाई भी होती थी, जब तक जन्नत या जहन्नुम जाने की जरूरत न हो मुस्लिम पुरूष ईलाज करवाने के लिए अस्पताल नहीं जाते थे।उनका कहना था कि इस्लाम में नसबंदी हराम है।बिहार में शिक्षिका स्कूलों में पढाने नहीं जाती थी उनकी जगह उनके पति कोरम पूरा कर देते थे मगर आपातकाल के बाद हर सरकारी स्कूल में शिक्षिका घूंघट में दिखने लगी,हुआ ये था कि एक महिला शिक्षक के पति को जबर्दस्ती पकड़कर उनकी नसबंदी कर दी गई दुखी पति ने आत्महत्या करने की कोशिश की लेकिन समय रहते उन्हें बचा लिया गया।बवाल बढ़ने पर जिलाधिकारी ने सरकारी खर्चे पर आँपरेशन कराकर उन्हें सामान्य किया।

हर क्षेत्र में दहशत थी जिसकी वजह से घूस लेने में कुख्यात सरकारी बाबू की भी हिम्मत नहीं पड़ती थी।पीडित को केवल एक प्रार्थना पत्र उस बाबू के खिलाफ देना होता था बाबू को पुलिस पाताल से भी ढूंढकर बाहर निकाल लाती थी।

दहशत का ये आलम था कि लोअर कोर्ट से लेकर सुप्रीमकोर्ट में काम समय पर होने लगा,बाबू से लेकर जज तक समय के पाबंद हो चले थे कोई भी पागल संजय गांधी के सनक का शिकार नहीं होना चाहता था।

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