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भूजल संकट से जूझता "संपूर्ण भारत"

Bhola Tiwari Jun 20, 2019, 12:49 PM IST टॉप न्यूज़
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अजय श्रीवास्तव

नीति आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अगर अभी नहीं सुधरे तो बूंद बूंद के लिए देश तरसेगा।2030 तक देश में पीने के पानी का बड़ा संकट उत्पन्न हो जाएगा जो लाइलाज होगा।रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दिल्ली, बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद सहित 21 भारतीय शहर 2020 तक भूजल से बाहर निकल जाएंगे, जिससे लगभग 100 मिलियन लोग प्रभावित होंगे।देश की 40% आबादी को पीने के पानी से मरहूम रहना होगा।नीति आयोग चेन्नई का उदाहरण देते हुए रिपोर्ट में लिखता है कि चेन्नई में तीन नदियाँ,चार जलानिकाय,पाँच आर्द्रभूमि और छह जलाशय पूरी तरह सूख जाए हैं।

चेन्नई को अब केवल और केवल वर्षा ऋतु हीं बचा सकती है वो भी जबरदस्त बारिश।चेन्नई में हालत बहुत गंभीर है और वहाँ की स्थिति देश भर को चेतावनी दे रही है कि अब भी संभल जाओ नहीं तो पानी बिना तडप तडप कर मरना तय है।

देश भर में भूजल संकट विकराल रूप ले रही है,आप बहुत से आदिवासी इलाकों में चले जाइए लोग नाले,चुआड से गंदे पानी पीने को मजबूर हैं।बहुत से नदियों का जल लगभग सूख चुका है,जिस जगह थोडी बहुत रूका हुआ पानी है लोग रेत में गड्ढा खोदकर उस पानी को पीने के लिए मजबूर हैं।

भारतीय संस्कृति में आदिकाल से हीं नदियों का ऐतिहासिक महत्व रहा है।बहुत सी सभ्यताएं नदियों के पास हीं पनपीं और अपना विस्तार किया।

वर्तमान में कृषि, पशुपालन, उद्योग-धंधों तथा पेयजल हेतु नदी जल व भूजल का ही सर्वाधिक उपयोग हो रहा है।उक्त उपयोगार्थ नदी जल से पर्याप्त पूर्ति न होने के फलस्वरूप भूजल का पर्याप्त दोहन किया जाता है, फलतः भूजल स्तर 1 से 1.5% प्रतिवर्ष के हिसाब से नीचे गिरता जा रहा है।परिणामस्वरूप भूजल के ऊपरी जल श्रोत सूख रहें हैं अतः जल की आवश्यकता की पूर्ति हेतु भूजल के निचले एंव गहरे जल श्रोतों का दोहन किया जा रहा है,इनमें अधिकांश जल लवणीय गुणवत्ता का मिल रहा है।

दरअसल भूजल स्तर के और नीचे गिरने के अनेकों कारण हैं जिसमें प्रमुख कारण खेती है।किसान अधिक उत्पादन कर रहा है और उसके लिए खेतों में पानी बहाया जा रहा है।बहुत सी राज्य सरकारें किसानों का वोट लेने के लिए बिजली माफ कर देती हैं इस वजह से भूजल का खूब दोहन होता है।अधिक पानी चाहने वाली नगदी फसलों का उगाया जाना भी एक कारण है।आजकल कृषि के यंत्रीकरण के फलस्वरूप जल के दोहन में अंधाधुंध वृद्धि हो रही है, क्योंकि पंपसेट ,ट्यूबवेल कम लागत और कम समय म़े अधिक जल निकाल रही है।भूजल का रिचार्ज न किया जाना भी एक महत्वपूर्ण कारण है।ग्लोबल वार्मिंग के कारण अब हर वर्ष कम बारिश हो रही है।ताल-तलैया में भरपूर पानी इकट्ठा नहीं हो पा रहा है।

नार्वे की एक टीम ने भारत में गर्मी के समय पानी की किल्लत पर एक विशेष लेख लिखा था।रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में वर्षाऋतु का 80% जल बहकर समुद्र में गिर जाता है।तालाबों की संख्या बेहद कम है,बांधों में गाद इतना ज्यादा है कि अधिक पानी इकट्ठा नहीं किया जा सकता।नदियों में पानी को रोकने की समुचित व्यवस्था नहीं है।

हमें भूजल स्तर के पतन को रोकने के लिए फसल चक्र के सिद्धांत को आत्मसात करना होगा।ड्रिप विधि से सिंचाई करने को प्राथमिकता देनी होगी।जीवाश्म खादों की मात्रा बढ़ाए जाने की आवश्यकता है।तालाबों, पोखरों एंव झीलों में बारिश के जल को रोकने की व्यवस्था करनी होगी।रिवर लिंक योजना को अपनाये जाने का प्रयास करना होगा।वृक्षारोपण अभियान को प्रायोरिटी में सबसे ऊपर रखना होगा।

बढ़ते जनसंख्या और शहरीकरण के विस्फोट की वजह से सबसे ज्यादा असर भूजल पर पड़ रहा है।इसके अंधाधुंध दोहन से आज भूजल संकट में है।नीति आयोग की चिंता जायज है अगर हम अब नहीं संभले तो फिर कभी संभल नहीं पाएंगे।

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