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वाटर लू का युद्ध

Bhola Tiwari Jun 20, 2019, 5:06 AM IST टॉप न्यूज़
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एस डी ओझा

1805 तक नेपोलियन बोनापार्ट का ब्रिटेन को छोड़कर लगभग सारे यूरोप पर अधिकार हो गया था। वह ब्रिटेन पर अधिकार जमाना चाहता था । इसके पहले वह ब्रिटेन को अलग थलग करना चाहता था । वह नहीं चाहता था कि रुस ब्रिटेन के साथ व्यापार करे । इसलिए उसने 1814 मग रुस पर आक्रमण कर दिया । नेपोलियन बोनापार्ट के सैनिक मास्को तक पहुँच गये थे । बाद में रुसी सैनिकों की मदद के लिए ब्रिटेन, आस्ट्रिया , पर्शिया

के सैनिक आ गये , जिससे नेपोलियन को पीछे हटना पड़ा । नेपोलियन को एक निर्जन द्वीप पर शरण लेनी पड़ी , जहां वह लगभग एक कैदी के रुप में रह रहा था । मौका पाकर वह भाग निकला और अपने देश फ्रांस पहुँच गया । वहाँ वह अपने देशवासियों को यह यकीन दिलाने में सफल हो गया कि फ्रांस की अस्मिता की रक्षा केवल वही कर सकता है । उसे फ्रांस की सत्ता फिर से वापस मिल गयी ।

फ्रांस की सत्ता मिल जाने पर यूरोप के सारे देश हक्के बक्के रह गये । फिर से ब्रिटेन, रुस , पर्शिया और हंगरी ने एक विशालकाय सेना लेकर फ्रांस पर चढ़ाई की । नेपोलियन बोनापार्ट ने भी अपनी सेना को संगठित किया । उसकी सेना कुछ कर पाने पर आमादा थी । नेपोलियन के सारे किए कराए पर पानी पड़ गया । उसकी सेना 18 जून 1815 को भारी बारिश में फंस गयी । उनको आगे बढ़ने में कठिनाई हो रही थी । ऐसे में ब्रिटेन ने एक बहुत बड़ी सेना लेकर हमला कर दिया । नेपोलियन के सैनिक 

प्राणप्रण से लड़े । ब्रिटेन के सैनिक पीछे हटने लगे । ऐसे में ब्रिटेन के लिए संकट मोचक बन आस्ट्रिया के सैनिक आ गये । यदि आस्ट्रिया के सैनिक एक घंटा लेट होते तो ब्रिटेन हार जाता । आस्ट्रिया के सैनिकों ने हारी हुई बाजी पलट दी । ब्रिटेन की जीत हुई । नेपोलियन बोनापार्ट पकड़ा गया ।

नेपोलियन बोनापार्ट को कैद कर सेंट हेलेन नामक टापू पर रखा गया । उसकी दिलेरी देखने के लिए अंग्रेजों ने उसके चाय पीते समय तोप का फायर कर दिया । अंग्रेजों ने सोचा होगा नेपोलियन बोनापार्ट कांप जाएगा , लेकिन नेपोलियन ने पहले चाय की एक सिप ली, फिर पूछा -

ये कैसी आवाज थी ? 1821 में सेंट हेलेना द्वीप पर नेपोलियन बोनापार्ट की मृत्यु हो गयी थी । उस समय उसकी उम्र केवल 52 वर्ष की थी ।

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