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मुजफ्फरपुर में नौनिहालों की हर घंटे में हो रही है दुखदायी मौत,संवेदनहीनता चरम पर

Bhola Tiwari Jun 17, 2019, 7:26 PM IST टॉप न्यूज़
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अजय श्रीवास्तव

उत्तरी बिहार में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिन्ड्रोम यानी चमकी बुखार हर घंटे एक बच्चे की जान ले रहा है।मुजफ्फरपुर के सबसे बड़े राजकीय मेडिकल कॉलेज एंड हाँस्पिटल एसकेएमसीएच ने आज एक विग्यप्ति जारी कर कहा है कि आज और अभी तक एसकेएमसीएच में 100 बच्चों की मौत हो गई है।ताजा आंकड़ों के अनुसार 414 बच्चों का इलाज चल रहा है।

मैं आपको बता दूँ एसकेएमसीएच में अस्पताल प्रशासन पूरी तरह फेल हो चुका है। डाक्टरों की बेहद कमी है। एक सीनियर डाक्टर दो दो आईसीयू अटैंड कर रहा है। अस्पताल पूरी तरह जूनियर डाक्टरों के कब्जे में है जो नौनिहालों की लाश पर अपनी ट्रेनिंग ले रहें हैं। हालत ये है कि अप्रशिक्षित नर्सें बच्चों को ग्लूकोज लगा रहीं हैं, बच्चों के नसों को बेदर्दी से खोजा जा रहा है।

कैमरा के सामने एक सीनियर डाक्टर ने ये स्वीकार किया है कि अस्पताल में जरूरी दवाओं का अभाव है। मैनेजर को बार बार दवाओं को मंगाने के लिए कहा जा रहा है मगर वो मैनेज नहीं कर पा रहें हैं।फर्स्ट स्टेज की दवाओं पर बच्चों का इलाज हो रहा है। बच्चा अगर क्रिटिकल पोजीशन में आ जा रहा है तो उस समय जो दवाओं की जरूरत होती है वो नहीं मिल पा रही है। इस बीमारी में हर बच्चे को वेंटिलेटर चाहिए जो नहीं मिल पा रहा। ये सारी बातें डाक्टर ने आँन कैमरा कही है जिसे झुठलाया नहीं जा सकता।

कल केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन अपने राज्यमंत्री अश्विनी चौबे और बिहार सरकार में स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय के साथ बिहार के एसकेएमसीएच के दौरे पर थे। मंत्रियों के आगमन पर अस्पताल की दुरवस्था पर लीपापोती कर दी गई और केन्द्रीय मंत्री के सामने ये दिखाया गया कि सारी स्थिति कंट्रोल में है लेकिन बच्चों की मौत, संसाधनों की कमी, वेंटिलेटर की कमी, जरूरी दवाओं की कमी ने व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है।एसकेएमसीएच का भष्ट प्रिंसिपल बोलता है कि सारी दवाइयाँ अस्पताल में मौजूद है फिर उसी अस्पताल का एक सीनियर डाक्टर उनकी पोल क्यों खोलता है ये जाँच का विषय है। इंसानियत इंसान में कैसे मर गई है ये केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन के प्रेस कॉन्फ्रेंस में देखने को मिली जब उनके राज्यमंत्री अश्विनी चौबे वहाँ सोते हुए दिखे। सोएंगे क्यों नहीं, एक दिन पहले बक्सर में अपनी जीत की पार्टी मनाकर जो आ रहे थे। जब पत्रकारों ने उन्हें चौदह दिन बाद आने पर सवाल किया तो वो पत्रकारों को हीं टेढा बोलने लगे तब हर्षवर्धन ने बात संभाली।जिस राज्य का स्वास्थ्य मंत्री ऐसी आपदा के समय विदेश यात्रा करे उसकी मानसिकता को समझा जा सकता है। एक ऐसा मुख्यमंत्री जिसके पास पटना से दिल्ली और अन्य जगह जाने का तो वक्त है मगर वो पटना से केवल 80 किलोमीटर दूर मुजफ्फरपुर नहीं जा पा रहें हैं, शायद वहाँ उनके घर का कोई बच्चा तड़प तड़प कर दम नहीं तोड़ रहा है। शर्म आती है ऐसे संवेदनहीन मुख्यमंत्री पर जिसका कलेजा पत्थर का हो गया है। वाकई दौलत और शोहरत ने नीतीश कुमार के आँख का पानी सुखा दिया है।

नीतीश कुमार जी आपने मृतक के परिजन को चार चार लाख की अनुग्रह राशि स्वीकृत की है उसका स्वागत है मगर परिवार के मुखिया के तौर पर आप अस्पताल का दौरा कर लेते तो शायद बच्चों का कुछ भला हो जाता।

मुख्यमंत्री जी आपने स्वयं कहा था कि मुजफ्फरपुर और उसके आसपास यह बीमारी दशकों से होता आ रहा है फिर आपने बच्चों की आईसीयू अलग से क्यों नहीं बनवाई? वेंटिलेटर की समुचित व्यवस्था क्यों नहीं की गई, दवाओं का समुचित भंडारण क्यों नहीं हुआ? अस्पताल में डाक्टरों की संख्या इतनी कम क्यों है? इसका जवाब आपके पास नहीं है या आप जानबूझकर देना नहीं चाहते।

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन झुनझुना देकर चले गए, आपको याद दिला दें कि 2014 में जब वो केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री थे तब भी वह मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच आए थे और बहुत से वायदे कर गए थे जो आज भी मंत्रीजी की वाट जोह रहें हैं। आपने कहा है कि मैं फिर मुजफ्फरपुर आऊंगा और एक साल के अंदर इसी अस्पताल में सौ बेड का एक नया वार्ड बनाएंगे, जिसमें पेड्रियाटिक आईसीयू होगा।उन्होंने बताया कि आस पड़ोस के जिलों में भी पेड्रियाटिक आईसीयू बनाने और उसमें 10 बेड़ की व्यवस्था के आदेश दे दिए है। हर्षवर्धन ने आगे कहा कि बीमारी की पहचान करने के लिए शोध होना चाहिए, जिसकी अभी भी पहचान नहीं है। इस बीमारी की प्रकोप को कंट्रोल करने के लिए अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ मिलकर काम करना चाहिए और प्रभावित इलाकों के सभी बच्चों का टीकाकरण किया जाना चाहिए,साथ हीं लोगों को बीमारी के बारे में जागरूक करने की जरूरत है।केन्द्र सरकार स्थिति को नियंत्रित करने, उचित उपचार करने और इसके लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा विकसित करने के लिए राज्य को वित्तीय के साथ सभी मदद करेगी।

हर्षवर्धन ने ये भी कहा कि मुजफ्फरपुर स्थित भारतीय मौसम विभाग के वेधशाला को उन्नत किया जाएगा ताकि इस रोग का आद्रर्ता और तापमान के बढ़ने के साथ संभावित संबंध की जानकारी लोगों को मिल सके।

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने मुजफ्फरपुर में लंबी चौडी घोषणा तो कर दी है अब ये देखना महत्वपूर्ण होगा कि वो कितने नौनिहालों की बलि लेकर पूरी होती है।

एक तरफ भारत दावा करता है कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारत काफी आगे बढ़ा है मगर हकीकत इसके उलट है। ब्रिटिश मेडिकल जर्नल की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था कई गंभीर मानकों पर भी फेल साबित हुई है। डाक्टरों की काबिलियत संदेह के घेरे में है।

जिस देश में 11हजार मरीज पर एक डाक्टर हो उस देश का तो भगवान हीं मालिक है,इसका ताजा उदाहरण आप मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच में देख सकते हैं। एक सीनियर डाक्टर दो आईसीयू को देख रहा है,एक आईसीयू में घर घंटे एक मौत हो रही है।

बदकिस्मती देखिए भारत अपनी जीडीपी का 1.5% हीं स्वास्थ्य सेवा पर खर्च करता है जो दूनिया के सबसे कम खर्च करने वाले देशों में एक है। ब्रिटेन अपनी स्वास्थ्य सेवा पर अपनी जीडीपी का 9.6% खर्च करता है, जबकि अमेरिका अपनी जीडीपी का 19% खर्च करता है।

आपको बता दें भारत में इलाज सबसे मंहगा है और इसका 70% खर्च भारतीय अपनी जेब से वहन करते हैं। बीमार होने पर एक आम भारतीय का सबसे बड़ा सहारा भगवान होता है न कि डाक्टर।भगवान भरोसे चिकित्सा व्यवस्था चल रही है और देश भी।

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