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नार्वे में हेल्थ सिस्टम का मुख्य फोकस जन चेतना

Bhola Tiwari Jun 17, 2019, 2:24 PM IST टॉप न्यूज़
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प्रवीण झा

(जाने माने चिकित्सक नार्वे)

दुनिया का सबसे उत्तम ‘हेल्थ सिस्टम’ नॉर्वे का कहा जाता रहा है। यहाँ एक डॉक्टर से मुलाकात के लिए एक हफ्ते का वेटिंग पीरियड है, विशेषज्ञ से मुलाकात के लिए महीना (वह भी ख़ास परिस्थितियों में ही संभव), रेडियोलॉजिकल जाँच के लिए दो हफ्ते से अधिक समय लगता है। यहाँ अच्छी विशेषज्ञ सुविधाएँ गिने-चुने स्थान पर ही उपलब्ध है। यहाँ बच्चे के जन्म की जिम्मेदारी मिडवाइफ (दाई) पर है, और वही अल्ट्रासाउंड भी करती है। यहाँ सीजेरियन न के बराबर होते हैं, तो स्त्री-रोग विशेषज्ञ कम ही होते हैं। स्वास्थ्य का भार नर्सिंग के ऊपर ही अधिक है। दवाओं का प्रयोग बहुत कम है, और अस्पताल के बेड यथासंभव फटाफट खाली कराए जाते हैं। सरकारी अस्पतालों में भी अर्थव्यवस्था पर बहुत अधिक फोकस है कि सब सस्ते में निपट जाए, और बहुत जरूरतमंदों पर ही कुछ धन लगाया जाए। 

लेकिन, यहाँ अस्पताल से बाहर अधिक जनचेतना है और शिक्षा, सैनिटेशन, मिनिमम वेज, तनाव-मुक्त वर्क-कल्चर, सामुदायिक स्वास्थ्य, नियमित कैंसर जाँच आदि पर अधिक फोकस है कि लोग अस्पताल न आए। और ऐसे कई लोग हैं जो कभी चिकित्सक के पास गए ही नहीं। मेरे शहर का मुख्य अस्पताल बंद होने की कगार पर है। यह बातें इसलिए कही कि डॉक्टर बढ़ाना, धड़ल्ले मेडिकल कॉलेज खोलना या स्वास्थ्य सुविधाएँ बढ़ाना, कहीं भी हल नहीं होता। मर्ज घटाना ही होता है। बल्कि डॉक्टर बढ़ने से मर्ज बढ़ते ही चले जाते हैं। ऐसे भी मर्ज जो मर्ज हैं ही नहीं।

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