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हाथ में चाँद जहाँ आया मुक़द्दर चमका

Bhola Tiwari Jun 16, 2019, 5:09 PM IST टॉप न्यूज़
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एस डी ओझा

चांद पर खनन की बात चल रही है । मून एक्सप्रेस उन 25 कम्पनियों में से एक है जो चांद पर खनन कर पैसा कमाना चाह रही है । गूगल ने इन कम्पनियों को भारी भरकम पुरुस्कार की घोषणा की है । मून एक्सप्रेस ने मून लैंडर का एक प्रोटोटाइप तैयार किया है , जिसका नासा छिद्रान्वेषण कर रही है । नासा से ओके हो जाने पर मून एक्सप्रेस कम्पनी चांद पर जाने के लिए योग्य हो जाएगी। यदि ऐसा सम्भव हो पाया तो इसके क्रांतिकारी परिणाम होंगे । 

चांद पर पानी का पता भारत के इसरो ने किया है । इस बात की तस्दीक नासा ने भी कर दी है । चांद पर यदि पानी है तो वह दिन दूर नहीं जब हम चांद पर खेती सहज रुप से करने लगेंगे । अभी चीन ने अपना चांग ई-4 अंतरिक्ष यान चांद के उस हिस्से पर उतारा है जो पृथ्वी से नजर नहीं आता है । ऐसा पहली बार हुआ है । चीन के प्रयासों का हीं कमाल है कि चांद की इस जमीन पर कपास के बीजों का अंकुरण सफलता पुर्वक हो पाया है । हालाँकि यह अंकुरण रात को बर्बाद हो गया । यहाँ रात का तापमान (-) 170 डिग्री तक चला जाता है । इतनी ठण्ड में कपास का यह अंकुरण कहाँ टिकेगा ?खैर ,अभी तो शुरुआत हुई है , कल को चांद पर खेती भी होगी ।

चांद पर वर्फ के रुप में भारी मात्रा मे पानी मौजूद है । यहाँ की चट्टानों में आॅक्सीजन भी कैद है । पानी और आॅक्सीजन का इस्तेमाल करने के लिए अंतरिक्ष वैज्ञानिक सतत प्रयत्नशील हैं । चांद के भावी नागरिकों के लिए यह बरदान साबित होगा । वह दिन दूर नहीं जब चांद पर बस्तियों का आगाज हो जाएगा । इन बस्तियों के लिए हवा व पानी थोक में मिलेगा । इस पर काफी समय से शोध चल रहा है , आगे के लिए भी अच्छी सम्भावना नजर आ रही है । प्रश्न यह उठता है कि बस्तियां बसाने का काम चांद पर हीं क्यों ? वह इसलिए कि चांद हमारी पृथ्वी से हीं टूटकर बना है । धरती और चांद में काफी साम्यता है । 

चांद पर मनुष्य के कदम छः बार चहलकदमी कर चुके हैं । अपोलो- 17 के अंतरिक्ष यात्री तो लगातार तीन दिन तक चांद की जमीन पर रह भी चुके हैं । चांद हमारा पड़ोसी है । हमें सबसे पहले अपने पड़ोस में रहने की सोचना चाहिए । पड़ोस गुलजार होने के उपरांत हमें मंगल व दूसरे अन्य ग्रहों पर मानव बस्तियां बसाने की सोचना चाहिए । एक सवाल और बनता है । क्या चांद पर कोई एक देश अपना हक जता सकता है ? नहीं कोई नहीं चांद पर अपना कब्जा जमा सकता है । 1967 के अंतरिक्ष संधि के अनुसार कोई भी चांद का मालिक नहीं बन सकता । आप चांद पर जा सकते हैं । घर बना सकते हैं , किन्तु चांद पर अपना हक नहीं जमा सकते । 

अब "वसुधैव कुटुम्बकम् " की तर्ज पर " चन्द्रैव कुटुम्बकम् " कहना होगा । आप वशीर वद्र की तरह यह नहीं कह सकते -

हाथ में चाँद जहाँ आया मुक़द्दर चमका ,

सब बदल जाएगा क़िस्मत का लिखा जाम उठा ।

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