ब्रेकिंग न्यूज़
दिमाग में गोबर, देह पर गेरुआ!          त्राल में सुरक्षाबलों ने तीन आतंकियों को मार गिराया         CAA-NRC-NPR के समर्थन में रिटायर्ड जज और ब्यूरोक्रेट्स ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र         अनब्याही माँ : चपला के बहाने इतिहास को देखा          भारतीय पत्रकारिता को फफूंदी बनाने वाली पत्रकार यूनियनें..         ब्रिटेन और फ्रांस को पीछे छोड़ भारत बना दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था         ..विधायक बंधू तिर्की और प्रदीप यादव आज विधिवत कांग्रेस के हुए         मरता क्या नहीं करता !          14 साल बाद बाबूलाल मरांडी की घर वापसी, जोरदार स्वागत         जेवीएम प्रमुख बाबूलाल मरांडी भाजपा में हुए शामिल, अमित शाह ने माला पहनाकर स्वागत किया         भारत में महिला...भारत की जेलों में महिला....          अनब्याही माताएं : प्राण उसके साथ हर पल है,यादों में, ख्वाबों में         कराची में हिंदू लड़की को इंसाफ दिलाने के लिए सड़कों पर उतरे लोग         बेतला राष्ट्रीय उद्यान में गर्भवती मादा बाघ की मौत !अफसरों में हड़कंप         बिहार की राजनीति में हलचल : शरद यादव की सक्रियता से लालू बेचैन          सीएम गहलोत की इच्छा, प्रियंका की हो राज्यसभा में एंट्री !         अनब्याही माताएं : गीता बिहार नहीं जायेगी          तेंतीस करोड़ देवी-देवताओं के देश में यही होना है...         केजरीवाल माँडल अपनाकर हीं सफलता प्राप्त कर सकतीं हैं ममता बनर्जी         28 फरवरी को रांची आएंगे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद         सत्ता पर दबदबा रखनेवाले जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर से लेकर तमाम शंकराचार्यों की जमात कहां हैं?          यही प्रथा विदेशों में भी....         इतिहास, शिक्षा, साहित्य और मीडिया..         जालसाजी : विधायक ममता देवी के नाम पर जालसाज व्यक्ति कर रहा था शराब माफिया की पैरवी         वार्ड पार्षदों ने नप अध्यक्ष के द्वारा मनमानी किए जाने की शिकायत उपायुक्त से की         पुलवामा हमले की बरसी पर इमोशनल हुआ बॉलीवुड, सितारों ने ऐसे दी शहीदों को श्रद्धांजलि         बड़ी खबर : प्रदीप यादव के कांग्रेस में शामिल होते ही झारखंड की सरकार गिरा देंगे : निशिकांत         क्या सरदार पटेल को नेहरू ने अपनी मंत्रिमंडल में मंत्री बनाने से मना कर दिया था?एक पड़ताल         वैलेंटाइन गर्ल की याद !         राजनीति में अपराधियों की एंट्री पर सुप्रीमकोर्ट सख्त, चुनाव आयोग और याचिकाकर्ता को दिये जरूरी निर्देश         राजनीतिक पार्टियों को सुप्रीम कोर्ट का.निर्देश : उम्मीदवारों का क्रिमिनल रेकॉर्ड जनता से साझा करें         सभ्य समाज के मुँह पर तमाचा है दिल्ली की "गार्गी काँलेज" और "लेडी श्रीराम काँलेज" जैसी घटनाएं         पूर्वजो के शब्द बनते ये देशज शब्द        

मां की कमी ना खले इसलिए जहांआरा ने नहीं की थी शादी

Bhola Tiwari Jun 16, 2019, 7:51 AM IST टॉप न्यूज़
img

अजय श्रीवास्तव

मुगल सल्तनत में उत्तराधिकार की लड़ाई अपने चरम पर थी,रोज शह-मात का खेल चलता था।दाराशिकोह और औरंगजेब के बीच सत्ता संघर्ष की लड़ाई में बादशाह शाहजहां और उनकी बड़ी बेटी "जहाँआरा" दाराशिकोह के साथ थे।

युद्ध में दाराशिकोह हार जाता है और आगरे के किले में बादशाह शाहजहां को नजरबंद कर दिया जाता है।बादशाह से मिलने की किसी को भी इजाजत नहीं थी सिवाय जहाँआरा के।

गौरतलब है कि जहाँआरा ने उत्तराधिकार की लडाई में दाराशिकोह का साथ दिया था मगर औरंगजेब की नजर में अपनी बड़ी बहन की वही इज्ज़त थी जो पहले हुआ करती थी।

जहाँआरा ने औरंगजेब के पास एक प्रस्ताव भी रखा था जिसमें औरंगजेब के चार भाईयों और उनके बड़े पुत्र को कुछ राज्य दे दिये जाएं और बाकी पूरी हिंदुस्तानी सल्तनत और बुलंद इकबाल का खिताब औरंगजेब को मिले।बडी बहन के इस प्रस्ताव को औरंगजेब ने पूरी नम्रता से खारिज कर दिया।

शाहजहां की मृत्यु के बाद औरंगजेब ने अपनी बड़ी बहन जहाँआरा को "पादशाह बेगम" का महत्वपूर्ण पद दे दिया।कहतें हैं कि औरंगजेब की छोटी बहन रोशनारा बेगम जो उत्तराधिकार की लड़ाई में औरंगजेब के साथ थी मगर उन्हें ये महत्त्वपूर्ण पद नहीं दिया गया।इसके पीछे जहाँआरा की त्याग और अपने भाइयों से बेपनाह मुहब्बत छूपी है।

जहाँआरा जब 17 साल की थीं तब उनकी माँ मुमताज महल की मृत्यु हो गई, तब से जहाँआरा ने अपने छोटे भाईयों और बहनों की परवरिश माँ जैसा किया।किसी को माँ की कमी न खले इस वजह से शायद उन्होंने विवाह तक नहीं किया।

बहुत से लेखकों ने जहाँआरा और शाहजहां के अवैध संबंधों पर खूब कलम काला किया है मगर इसके कहीं भी स्पष्ट प्रमाण नहीं मिलते जिससे ये कहा जाय कि बाप बेटी में कुछ गलत था।

सितंबर 1681 में 67 साल की उम्र में जहाँआरा का निधन हो गया, बताते हैं कि जब इसकी खबर बादशाह औरंगजेब को मिली तो वो अजमेर से डक्कन जाने के रास्ते में था।उन्होंने शोक मनाने के लिए शाही काफिले को तीन दिनों तक रास्ते में ही रोकें रखा।

जहाँआरा की वसीयत के अनुसार दिल्ली में निजामुद्दीन औलिया की मजार के बगल में उन्हें दफना दिया गया।

Similar Post You May Like

Recent Post

Popular Links