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कहर ढा रहा है उत्तरी बिहार में "चमकी बुखार"

Bhola Tiwari Jun 15, 2019, 5:18 PM IST टॉप न्यूज़
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अजय श्रीवास्तव

इन दिनों उत्तरी बिहार खौफ में जी रहा है, मुजफ्फरपुर,सीतामढ़ी, शिवहर, वैशाली, पूर्वी चंपारण में हाइपोग्लाइसीमिया और अन्य अज्ञात बीमारी से मरने वाले बच्चों की संख्या 69 हो गई है। इस आंकड़े में वो बच्चे शामिल नहीं हैं जो किसी कारणवश अस्पताल नहीं पहुंच सकें हैं।एईएस (एक्टूड़ इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम) और जेई (जापानी इंसेफेलाइटिस) को उत्तरी बिहार में चमकी बुखार कहते हैं। इसमें बच्चों को तेज बुखार, शरीर में ऐंठन, निर्जलीकरण, उल्टी, चिडचिडापन और बेहोशी हो जाती है।

अगर आप केवल मुजफ्फरपुर की बात कर लें तो सौ से ज्यादा बच्चे यहाँ के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल श्रीकृष्ण मेडिकल काँलेज एंड़ हाँस्पिटल और प्राइवेट अस्पताल केजरीवाल मातृ सदन में भर्ती हैं।एसकेएमसीएच में अभी तक संतावन बच्चों की मौत की पुष्टि हो चुकी है,केजरीवाल मातृ सदन अस्पताल प्रशासन ने 11 मौत की पुष्टि की है।

आपको बता दें यहाँ दशकों से ये बीमारी इसी मौसम में हो रही है,हर साल पचास-साठ बच्चे इस अज्ञात बीमारी से कालकवलित होते हैं मगर काफी प्रयास के बाद भी इसे रोका नहीं जा पा रहा है।विश्व स्वास्थ्य संगठन की कई टीमों ने यहाँ कई बार दौरा किया मगर बीमारी को पकड़ने में नाकाम रहा है।इस बीमारी की जाँच के लिए केन्द्र सरकार ने दिल्ली से आई नेशनल सेंटर फाँर डिजीज कंट्रोल की टीम तथा पुणे के नेशनल इंस्टीट्यूट आँफ वायरोलॉजी(एनआईवी)की टीम भी को मुजफ्फरपुर भेजा था,वो भी पता लगाने में नाकाम साबित हुई है।

आपको बता दें ये बीमारी पंद्रह साल तक के बच्चों में देखी गई है, मरने वाले बच्चों की उम्र एक से सात साल सबसे ज्यादा है।इस बुखार में बच्चे के शरीर में काफी कंपकंपी होती है,दाँत किटकिटाने लगते हैं, जिसे वहाँ के आम भाषा में चमकना भी कहते हैं, इसलिए इसे चमकी बुखार कहते हैं।

डाक्टरों का कहना है कि जब चमकी बुखार के लक्षण दिखने लगे तो पीडित बच्चे को तरल पदार्थ समय समय पर देते रहना चाहिए नहीं तो बच्चा डीहाइड्रेशन का शिकार हो जाएगा और उसपर दवा का असर होना बंद हो जाएगा।चमकी बुखार के असर से शुगर लेबल डाउन हो जाता है, इसलिए बच्चे को तरल पदार्थ में चीनी मिलाकर देना बेहतर होता है।अगर इन सब बातों को अमल में लाया जाए तो अस्पताल पहुँचने तक बच्चे को कुछ नहीं होगा।

स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय ने मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच का दौरा किया और कहा कि सरकार ने अपनी तरफ से सारा इंतजाम किया है,इस बीमारी में देनेवाली जो दवाइयां डाक्टरों ने तय की हैं उसकी कमी नहीं है और कमी होने भी नहीं दी जाएंगी।राज्य सरकार ने एसकेएमसीएच में पीआईसीयू की व्यवस्था की है और इसका विस्तार भी किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी कहा है कि स्वास्थ्य विभाग इस पूरे मामले पर नजर रख रहा है।बरसात से पहले ये बीमारी हर साल उत्तरी बिहार में कहर बरपाती है,वैज्ञानिक इस बीमारी की रोकथाम के लिए प्रयासरत हैं उम्मीद है जल्दी कोई वैक्सीन की खोज हो जाएगी।

गौरतलब है कि ये बीमारी भीषण गर्मी में हीं उभरती है जब उमस अपने चरम पर होती है।स्वास्थ्य विभाग से जारी एक सरक्यूलर में कहा गया है कि बच्चों को पेड से गिरा हुआ और खाली पेट लीची न खाने दें।खालीपेट लीची खाने से बच्चों में शुगर लेबल एकाएक गिरने लगता है और बच्चा बीमारी की जद में आ जाता है।

मरीजों की शिकायत ये है कि एक बार डाक्टर सुबह में देख कर चला जाता है फिर वापस सुबह में हीं आता है, सरकार को इन दिनों तीनों शिफ्ट में डाक्टरों की ड्यूटी लगानी चाहिए।एसकेएमसीएच के प्रिंसिपल का कहना है कि डाक्टर दिन-रात एक किये हुए हैं,अब कौन सच बोल रहा है या झूठ बोल रहा ये तो उसका ईमान हीं जानेगा मगर मुझे नहीं लगता कि मरीज जिसका बच्चा भर्ती है वो डाक्टर के ऊपर झूठा आरोप लगाएगा।

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