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"रावण" के रिहाई के मायने

Bhola Tiwari Jun 14, 2019, 5:58 AM IST टॉप न्यूज़
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अजय श्रीवास्तव

उत्तरप्रदेश सरकार ने सहारनपुर दंगों के तथाकथित आरोपी चंद्रशेखर आज़ाद "रावण" को आधी रात आजाद कर दिया,उनपर दंगे भड़काने का आरोप लगाकर करीबन पंद्रह महीने पहले गिरफ्तार कर लिया गया था।

आपको बता दें इलाहाबाद हाईकोर्ट से रावण की जमानत भी मंजूर हो गयी थी मगर रिहाई के ऐनवक्त पहले उसे राष्ट्रीय सुरक्षा कानून(रासुका)के तहत गिरफ्तार कर फिर जेल में डाल दिया गया।

दलितों में ये बात घर कर गई थी कि दंगों को भड़काने में ठाकुरों को गिरफ्तार नहीं किया गया जबकि सरासर उनकी गलती थी।कुछ दलित संगठनों ने तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर अपने स्वजातीय ठाकुरों के संरक्षण का भी आरोप मढ़ा था लेकिन प्रदेश की सरकार अपने निर्णय पर अडिग रही फिर एकाएक क्या हो गया कि उन्हें समय पूर्व रिहा कर दिया गया।

चंद्रशेखर आजाद "रावण" की रिहाई के संबंध में सरकार की ओर से जो बयान जारी हुआ है,उसके मुताबिक चंद्रशेखर को उनकी माँ के वजह से रिहा किया गया है क्योंकि उन्होंने इसके लिए एक प्रार्थना पत्र दिया था।

इस बाबत चंद्रशेखर कहतें हैं कि माँ ने तो जुलाई में हीं आवेदन दे रखा है फिर अब कैसे अंतरात्मा जाग गई।चंद्रशेखर का स्पष्ट कहना है कि सरकार के इस कदम के पीछे उन्हें किसी राजनीतिक साजिश की बू आ रही है।भाजपा सरकार उनकी राजनीतिक हत्या करना चाहती है।चंद्रशेखर आजाद का कहना है कि "सुप्रीमकोर्ट में सरकार को पता था कि उसे फटकार लगने वाली है दूसरे रासुका को चार बार बढ़ाया जा चुका था,अब आगे वो बढ़ नहीं सकती थी।"

दरअसल दलित एक्ट पर अध्यादेश पारित कर सरकार ये सोच रही है कि दलित उनसे खुश हैं और उनके साथ हैं।चंद्रशेखर ने जेल से बाहर आते हीं भाजपा पर कसकर हमला बोला है और कहा है कि दलित ये समझते हैं कि भाजपा सरकार दलित विरोधी मानसिकता रखते हैं और उन्हें जल्द हीं उखाड़ कर फेंक दिया जाऐगा।

मुझे नहीं लगता चंद्रशेखर किसी सेटिंग के तहत बाहर आएं हैं क्योंकि अगर सेटिंग होती तो वे भाजपा का इतना मुखर विरोध नहीं करते।आपको याद हीं है गुजरात के हार्दिक पटेल अनशन पर बैठे थे,बीस दिनों के अनशन पर रहने के बावजूद कोई शीर्षस्थ नेता उन्हें मनाने नहीं पहुँचा क्योंकि उनकी राजनीति एक्सपोज हो गई है।एक तरफ वो भाजपा से बारगेनिंग करतें हैं तो दूसरी तरफ कांग्रेस से।इस बार उन्हें पता लग गया है कि सौदेबाजी हमेशा सफल नहीं होती।चंद्रशेखर आजाद को भाजपा "बसपा" का विकल्प बनाना चाहती है जिससे उसका इस्तेमाल महागठबंधन को कमजोर करने के लिए किया जा सके मगर चंद्रशेखर इस बात को समझ गए हैं कि वे उनका इस्तेमाल करना चाहते हैं।चंद्रशेखर की राजनीति भाजपा और अपर कास्ट के विरोध पर हीं टिकी है अगर तनिक भी कोताही हुई तो उनको रसातल में जाने से कोई रोक नहीं सकता ये तो तय है।

आपको याद होगा जब चंद्रशेखर की गिरफ्तारी हुईं थी तो जनमानस में ये संदेश गया था कि सरकार ठाकुरों के पीछे खडी है,इसी इमेज को तोडऩे के लिए ये सारी कवायद हो रही है।

सियासतदां ये समझते हैं कि जनता ये सब नहीं समझती,मगर आज जनता बहुत जागरूक हो गई है वो उड़ते हुए चिडिय़ा के पर गिन लेती है।

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