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यहां विधवाओं की बहुत बड़ी बस्ती है

Bhola Tiwari Jun 13, 2019, 6:04 AM IST टॉप न्यूज़
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एस डी ओझा

सुंदरी के पेड़ इस वन में बहुतायत में पाया जाता है । इसलिए इस वन का नाम सुंदर वन पड़ा । यह वन दस हजार वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है । पश्चिम वंगाल स्थित यह वन 54 द्वीपों में बंटा हुआ है । इस वन क्षेत्र में तकरीबन 50 लाख लोग रहते हैं । समुद्र के किनारे अवस्थित होने के कारण यहां के पानी में खारापन बहुत ज्यादा है । इसलिए खेती केवल 20-30% हीं होती है । ज्यादातर लोग मछली पकड़ते हैं । कुछ लोग शहद निकालने का काम करते हैं । कुछ लोग लकड़ियाँ काट कर उनसे अपनी जीविका चलाते हैं । सुंदर वन की सुंदरता की चर्चा देश विदेश में होती है । इसलिए देश विदेश से इस वन को देखने बहुत से टूरिस्ट आते हैं ।

सुंदर वन राॅयल बंगाल टाइगर का गढ़ रहा है । तकरीबन सैकड़ों बाघ होंगे इस क्षेत्र में । जो लोग घने जंगलों में शहद निकालने या लकड़ी काटने जाते हैं , वे इन आदमखोर बाघो का निवाला बन जाते हैं । सरकार इनको मुखौटे देती है । इन मुखौटों को ये लोग पीछे की तरफ बांधते हैं । आम तौर पर बाघ पीछे की तरफ से आक्रमण करते हैं । जब मुखौटा पीछे की तरफ होगा तो बाघ मूर्ख बन जाएगा और आक्रमण नहीं कर पाएगा । सरकार इन बाघों को रोकने के लिए गांव के बाहर जाल भी लगवाती है । इतना सब कुछ होते हुए भी हर साल तकरीबन 50 लोगों को बाघ मार हीं देते हैं । एक दो बाघ आदमखोर हो तो उनसे निपटा जा सकता है । यहां के सारे बाघ आदम खोर हो गये हैं । दलदली इलाके में मछुआरे कई बार मछली पकड़ते समय मगरमच्छ के जबड़ों में भी पहुँच जाते हैं । सुंदर वन में कोबरा भी आतंक मचाते रहते हैं ।

सुंदर वन के हिंदू मुसलमान वन बीवी की पूजा करते हैं । इन्हें वन देवी , व्याघ्र देवी या वन दुर्गा भी कहते हैं । इस देवी की सवारी बाघ होता है । जब पुरुष मछली मारने , शहद बटोरने व लकड़ी काटने जंगल जाते हैं तो जाने से पहले इस देवी की पूजा अवश्य करते हैं । वन दुर्गा बाघ , मगरमच्छ और नागों से इनकी रक्षा करती हैं । दक्षिण राय नाम का राक्षस बाघ की शकल में मनुष्यों पर हमला करता है । जब कोई मनुष्य इन खतरनाक जानवरों के द्वारा मारा जाता है तो सब यही सोचते हैं कि कहीं न कहीं वन देवी की सेवा में चूक हुई है । अगली बार वन देवी की और जोर शोर से पूजा होने लगती है । जब पति घने वन के लिए प्रस्थान करते हैं तो पत्नियों के चेहरे लटक जाते हैं । वे मनौती मनाती हैं कि उनके पति सकुशल वापस लौट आएं । वे व्रत रखती हैं । शाकाहारी भोजन करती हैं । साज श्रृंगार करना छोड़ देती हैं । रंगीन कपड़े नहीं पहनतीं हैं । जब पति लौट आते हैं तभी वे साज श्रृंगार करती हैं । व्रत का उद्दापन करतीं हैं । घर में उत्सव का वातावरण हो जाता है । 

सुंदर वन के इलाकों में विधवाओं की एक बहुत बड़ी बस्ती बन गयी है । इन विधवाओं को हेय दृष्टि से देखा जाता है । इन्हें "स्वामी खेका " ( पति हंता ) कहकर अपमानित किया जाता है । एक स्वंय सेवी संस्था इनके लिए काम कर रही है । यह लोगों को जागरुक कर रही है कि पति के खोने में पत्नी का हाथ कैसे हो सकता है ? वह पति के सकुशल लौट आने की मंगल कामना करती है , फिर उसे पति हंता क्यों कहा जाय ? पति के मरने के बाद मुआवजा मिलने में भी दिक्कत आती है । पति के लाश के अवशेषों को अधिकारियों को दिखाना पड़ता है लाश के अवशेष लाने जाने वाले लोगों पर भी कई बार बाघ आक्रमण कर देता है । अब इनकी मदद करने के लिए एक और संस्था " सुलभ इण्टरनेशनल " आगे आई है ।

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