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" शहर में बड़ा आदमी बनना है तो काले कारनामे करना होगा "

Bhola Tiwari Jun 04, 2019, 7:04 AM IST टॉप न्यूज़
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एस डी ओझा

एक गांव का गंवई गंवार शहर में कुछ काम करने की गरज से आता है । पानी पीने के लिए एक बिल्डिंग के बाहर नलके मुंह में ओक लगाता है , तभी पुलिस की सीटी की सुनकर वह भागकर उसी बिल्डिंग में छुप जाता है । बिल्डिंग में छुपने के बाद उसे पता चलता है कि इस बिल्डिंग में ऐसे ऐसे सफेदपोश लोग हैं , जो अवैध शराब का धंधा करते हैं । वे नकली नोट छापते हैं । नकली दवाई बनाते हैं । पर्दे के पीछे के सारे भ्रष्टाचार करते हैं । एक भूखा प्यासा किसान का बेटा पुलिस से बचने के लिए इस बिल्डिंग में जब शरण लेता है तो उसके सामने ये सारे भ्रष्टाचार उजागर होते हैं ।

फिल्म "जागते रहो " एक सामाजिक व्यंग्य है । इस फिल्म में राजकपूर मुश्किल से दो या चार सम्वाद बोलते हैं , पर वो बिना बोले हीं बहुत कुछ बोल जाते हैं । उनके हाव भाव , चाल ढाल व आंखें सभी सम्वाद बोलते हैं । यदि आज कोई फिल्म " जागते रहो " की रिमेक बनाना चाहे तो उसे राजकपूर के किरदार के लिए दिन में भी लालटेन लेकर कलाकार ढूंढना होगा । राजकपूर ने इस किरदार को जीवंत करने में अपना सर्वश्रेष्ठ दिया था । सत्यजीत रे को अपना आदर्श मानने वाला बंगाली समुदाय भी इस फिल्म को देखकर " कोतो तो राजकपूर , कोतो तो राजकपूर " कह चिल्ला उठा था ।

जहां दर्द बयां करने का क्षण आता है , वहां राजकपूर नहीं बोलते हैं । बोलती हैं तो केवल उनकी आंखें । आंखों से इतना भाव प्रणय अभिनय कराना केवल और केवल राजकपूर के हीं वश की बात थी । पूरी फिल्म में न बोलने वाले राजकपूर में जाने कहां से साहस आ जाता है । वे बोल उठते हैं - 

" यहां शहर में बड़ा आदमी बनना है तो काले कारनामे करना होगा ।"

अंत में एक बच्चा राजकपूर के किरदार में अदम्य साहस भर देता है । बच्चा कहता है कि अगर तुम चोर नहीं हो तो भाग क्यों रहे हो ? यही इस फिल्म का टर्निंग प्वाइंट है । राजकपूर का किरदार आत्मविश्वास से लवरेज हो उस बिल्डिंग से चल पड़ता है । कोई उससे कुछ नहीं पूछता । कोई उस पर शक नहीं करता । नर्गिस सुबह के वक्त " जागो मोहन प्यारे " का भजन गाती हुई पानी का घड़ा भर रही होती है । राजकपूर उसके हाथ से पानी पीकर तृप्त होता है ।

फिल्म "जागते रहो " एक अंतराष्ट्रीय स्तर की फिल्म थी , जिसे अंतराष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुका है । इस फिल्म का गीत व संगीत काफी सुमधुर बन पड़ा है , लेकिन सर्वोपरि है राजकपूर का किरदार और राज कपूर का अभिनय ।

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